भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार को BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को अपना इस्तीफा सौंपते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से अलग होने का फैसला किया। इस्तीफे के बाद एक इंटरव्यू में पूनावाला ने अपने फैसले की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रवक्ताओं का पद स्वैच्छिक होता है और उन्हें सैलरी नहीं मिलती। पूनावाला के मुताबिक, पिछले कुछ समय से वह अपने आर्थिक और निजी हालात को लेकर दोबारा नौकरी करने के बारे में विचार कर रहे थे।
लंबे समय से इस्तीफे पर कर रहे थे विचार
शहजाद पूनावाला ने बताया कि BJP से अलग होने का फैसला उन्होंने अचानक नहीं लिया। वह करीब दो साल से इस बारे में विचार कर रहे थे। उनके अनुसार, 2024 से ही वह दोबारा नौकरी शुरू करने और अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा कि राजनीति में रहते हुए उन्होंने लगातार काम किया और संगठन की जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता से निभाया। लेकिन जब उनके सामने राजनीति और नौकरी में से किसी एक को चुनने की स्थिति आई, तो उन्होंने निजी क्षेत्र में वापस जाने का फैसला किया।
‘प्रवक्ताओं को नहीं मिलती सैलरी’
अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए पूनावाला ने कहा कि BJP में प्रवक्ता का पद स्वैच्छिक होता है और इसके लिए नियमित वेतन नहीं मिलता। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए अब उन्हें अपने करियर पर दोबारा ध्यान देना जरूरी लगा। पूनावाला ने यह भी कहा कि वह अपने इस फैसले पर कायम हैं और काफी सोच-विचार के बाद ही उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है।
30 जुलाई को भी इस्तीफे की पेशकश की थी
पूनावाला के मुताबिक, उन्होंने पहली बार 30 जुलाई को पार्टी नेतृत्व के सामने इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी। उस समय नेतृत्व की ओर से उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया था। इसके बाद उन्होंने कुछ समय लेकर पूरे मामले पर विचार किया। हालांकि, अंत में उन्होंने राजनीति से अलग होकर नौकरी करने का फैसला बरकरार रखा और सोमवार को औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप दिया।
PM मोदी और BJP की विचारधारा से दूरी नहीं
पार्टी छोड़ने के बाद शहजाद पूनावाला ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या BJP की विचारधारा से किसी तरह की दूरी की वजह से नहीं है। उन्होंने कहा कि वह संगठन से अलग हो रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी, उनके समर्थकों और पार्टी की विचारधारा से उनका मतभेद इस इस्तीफे का कारण नहीं है। उनके अनुसार, यह फैसला मुख्य रूप से निजी और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ा है।
BJP के सोशल मीडिया विभाग में जाने की खबरों को किया खारिज
शहजाद पूनावाला के इस्तीफे के बीच BJP के सोशल मीडिया विभाग में उन्हें जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें भी सामने आई थीं। हालांकि, उन्होंने ऐसी किसी संभावना से साफ इनकार किया। BJP में सोशल मीडिया विभाग से जुड़ी नई जिम्मेदारियों के तहत दीपक म्हास्के को सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है। उनके साथ प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। पूनावाला ने कहा कि सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी में उनकी कोई रुचि नहीं थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बाहर से यह काम जितना आसान या आकर्षक दिखाई देता है, वास्तविकता में इसकी जिम्मेदारी काफी चुनौतीपूर्ण है।
अब निजी क्षेत्र में करेंगे नौकरी
BJP छोड़ने के बाद शहजाद पूनावाला अब निजी क्षेत्र में नौकरी करने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान अपने वित्तीय हालात को मजबूत करने और पेशेवर जीवन को दोबारा व्यवस्थित करने पर रहेगा। राजनीतिक सक्रियता से अलग होने का उनका फैसला ऐसे समय में आया है जब वह लगातार पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर BJP का पक्ष मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर रखते रहे हैं।
इस्तीफे से पहले शुरू की नई पहल
पूनावाला ने इस्तीफा देने से एक दिन पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘द मैनिफेस्टो’ नाम से एक नई पहल शुरू की थी। इस पहल के जरिए उन्होंने मध्यम वर्ग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने टैक्स देने वाले लोगों को मिलने वाली सुविधाओं, सड़कों और बुनियादी ढांचे की स्थिति, स्कूलों, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए। इससे संकेत मिलता है कि राजनीति से अलग होने के बावजूद वह सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी बात रखने का सिलसिला जारी रख सकते हैं।