नई दिल्ली: चुनाव के दौरान कथित तौर पर काले धन और अन्य गलत तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ ऐसे मामलों को राज्य सरकार अपनी ओर से वापस नहीं ले सकेगी। इसके लिए संबंधित हाई कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी। यह मामला State of Karnataka vs Prathik Parasrampuria से जुड़ा है, जिसमें चुनाव के दौरान काले धन और अन्य चुनावी अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रही है।
सांसद-विधायक के बाद उम्मीदवारों पर भी लागू होगा नियम
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि मौजूदा सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों को वापस लेने के लिए हाई कोर्ट की मंजूरी की जो व्यवस्था है, उसका सिद्धांत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों पर भी लागू होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह व्यवस्था निष्पक्षता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को भी आपराधिक मामलों के मामले में निर्वाचित सांसदों और विधायकों के समान जवाबदेही के दायरे में लाया जाएगा।
अदालत के मुताबिक, इसका संदेश स्पष्ट है कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को भी गलत गतिविधियों में शामिल होने को हल्के में नहीं लेना चाहिए और केवल राजनीतिक सत्ता बदलने से उनके खिलाफ शुरू हुई कानूनी कार्रवाई खत्म नहीं होनी चाहिए।
राजनीतिक सत्ता बदलने पर केस वापसी पर चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी मामलों को राजनीतिक बदलाव से जोड़कर वापस लिए जाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए ऐसे मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप की गुंजाइश कम होनी चाहिए।
अदालत ने चुनाव आयोग के उस रुख का भी उल्लेख किया कि सामान्य तौर पर चुनावी अपराधों से जुड़े मामलों को वापस नहीं लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि राजनीतिक सत्ता में बदलाव के बाद ऐसे मामलों को वापस लेने की प्रवृत्ति न्याय प्रणाली की भावना के खिलाफ है।
10 लाख से ज्यादा नकदी मिलने पर आयकर विभाग को सूचना
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में काले धन के इस्तेमाल को रोकने के लिए कई अन्य निर्देश भी जारी किए। इनमें स्टैटिक सर्विलांस टीम (SST) द्वारा जांच के दौरान 10 लाख रुपये से अधिक नकदी मिलने पर आयकर विभाग को कार्रवाई के लिए सूचित करने का निर्देश शामिल है।
अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान नकदी या अन्य संदिग्ध संपत्ति की जब्ती की सूचना संबंधित अधिकारियों तक जल्द पहुंचाई जानी चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, जब्ती की जानकारी 24 घंटे के भीतर जिला मजिस्ट्रेट तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
एक साल में जांच पूरी करने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारियों को निर्देश दिया कि चुनाव से जुड़े ऐसे आपराधिक मामलों की जांच FIR दर्ज होने की तारीख से एक साल के भीतर पूरी करने की हरसंभव कोशिश की जाए। अगर किसी मामले में जांच पूरी करने में अधिक समय लगता है तो देरी के कारणों को दर्ज कर संबंधित चुनाव प्राधिकरण को रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
अदालत ने ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए हाई कोर्ट स्तर पर उपयुक्त अदालतों को नामित करने की दिशा में भी निर्देश दिए हैं।
चुनावी प्रक्रिया में काले धन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया में काले धन की भूमिका को लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता बताया। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र, कानून का शासन और चुनावी प्रक्रिया आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। इनमें से किसी एक से समझौता होने पर बाकी दोनों भी प्रभावित होते हैं।
कोर्ट के निर्देशों का उद्देश्य चुनाव के दौरान धनबल के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाना, चुनावी अपराधों की जांच में तेजी लाना और राजनीतिक कारणों से आपराधिक मामलों को वापस लिए जाने की संभावना को कम करना है।