मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। बड़ी संख्या में शिक्षकों के एक साथ ऐप पर लॉगइन करने से आने वाली तकनीकी दिक्कतों को कम करने के लिए अब अटेंडेंस दर्ज करने से पहले CAPTCHA प्रक्रिया जोड़ी गई है। इसके साथ ही शिक्षकों को निर्धारित समय के बाद भी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए 15 मिनट का ग्रेस पीरियड देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के साथ अतिथि शिक्षक भी डिजिटल माध्यम से उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। एक ही समय पर हजारों शिक्षकों के ऐप पर सक्रिय होने से सर्वर पर दबाव बढ़ जाता था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए 'हमारे शिक्षक ऐप' में तकनीकी बदलाव किए गए हैं। अब उपस्थिति दर्ज करने से पहले शिक्षक को CAPTCHA में दिए गए आसान सवाल का सही जवाब देना होगा।
3 लाख से ज्यादा शिक्षक दर्ज कर रहे ई-अटेंडेंस
मध्यप्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था के तहत 3 लाख से अधिक शिक्षक और अतिथि शिक्षक डिजिटल तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में यूजर्स के एक साथ ऐप इस्तेमाल करने पर सर्वर और सिस्टम पर अचानक लोड बढ़ जाता है। खासकर सुबह स्कूल शुरू होने के समय बड़ी संख्या में शिक्षक एक साथ लॉगइन करते हैं। इसी वजह से कई बार ऐप के संचालन में तकनीकी परेशानी सामने आने की स्थिति बनती है। नई CAPTCHA व्यवस्था का उद्देश्य इसी तरह के अनावश्यक या एक साथ पड़ने वाले सर्वर लोड को नियंत्रित करना बताया गया है।
'हमारे शिक्षक ऐप' में जोड़ा गया CAPTCHA
अब शिक्षकों को ई-अटेंडेंस दर्ज करने से पहले CAPTCHA प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसमें सामान्य जोड़-घटाव से जुड़ा एक आसान सवाल स्क्रीन पर दिखाई देगा। शिक्षक को उसका सही उत्तर दर्ज करने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी। इस तकनीकी व्यवस्था के जरिए सिस्टम पर एक साथ आने वाले लॉगइन अनुरोधों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। विभाग की ओर से ऐप की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है, ताकि उपस्थिति दर्ज करने के दौरान तकनीकी परेशानी कम हो और सर्वर पर अचानक बढ़ने वाला दबाव नियंत्रित किया जा सके।
शिक्षकों को मिलेगा 15 मिनट का ग्रेस पीरियड
ई-अटेंडेंस व्यवस्था में समय को लेकर भी शिक्षकों के लिए बदलाव किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार पहली पाली में सुबह 10:30 बजे तक और दूसरी पाली में शाम 4:15 बजे तक उपस्थिति दर्ज कराने का समय निर्धारित है। अब इसमें 15 मिनट का ग्रेस पीरियड देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यानी निर्धारित समय के आसपास किसी उचित कारण से देरी होने पर शिक्षकों को अतिरिक्त समय का लाभ मिल सकेगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि शिक्षक नियमित रूप से देरी से स्कूल पहुंचें। विभाग की व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक और उचित परिस्थितियों में होने वाली देरी के लिए सीमित राहत देना है।
उचित कारण होने पर प्राचार्य को देनी होगी सूचना
अगर किसी शिक्षक को किसी वाजिब कारण से स्कूल पहुंचने में देरी होती है, तो वह संबंधित स्कूल के प्राचार्य को इसकी जानकारी दे सकता है। इसके लिए व्हाट्सऐप के माध्यम से सूचना देने की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि इस सुविधा का बार-बार इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रेस पीरियड या देरी की सूचना देने की व्यवस्था नियमित लेट आने का माध्यम न बन जाए। शिक्षकों से अपेक्षा की जा रही है कि वे निर्धारित समय के अनुसार ही स्कूल पहुंचें और समय पर ई-अटेंडेंस दर्ज करें।
'हमारे शिक्षक ऐप' की सर्वर क्षमता भी बढ़ाई गई
ई-अटेंडेंस को लेकर सामने आई तकनीकी चुनौतियों के बीच 'हमारे शिक्षक ऐप' की सर्वर क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया गया है। विभाग की ओर से सिस्टम को अधिक संख्या में यूजर्स का एक साथ लोड संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे पहले बड़ी संख्या में शिक्षकों के एक ही समय पर ऐप से लॉगआउट करने के कारण तकनीकी समस्या सामने आई थी। बताया गया कि एक समय पर करीब पौने दो लाख शिक्षकों के एक साथ लॉगआउट करने से सिस्टम की व्यवस्था प्रभावित हुई थी। इसके बाद सर्वर क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ CAPTCHA जैसी प्रक्रिया को जोड़ा गया है, ताकि ऐप पर अचानक आने वाले अत्यधिक लोड को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
एक साथ लॉगइन से क्यों बढ़ता है सर्वर पर दबाव?
ई-अटेंडेंस व्यवस्था में सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती यूजर्स की संख्या है। जब लाखों शिक्षक लगभग एक ही समय पर ऐप खोलकर अपनी उपस्थिति दर्ज करने की कोशिश करते हैं, तो सर्वर पर एक साथ बड़ी संख्या में रिक्वेस्ट पहुंचती हैं। ऐसे में सिस्टम की प्रोसेसिंग क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है। CAPTCHA जोड़ने का एक उद्देश्य इस प्रक्रिया को थोड़ा नियंत्रित करना भी है। इसके अलावा सर्वर क्षमता बढ़ाने से सिस्टम को अधिक यूजर्स का ट्रैफिक संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आयुक्त अभिषेक सिंह भी रोज लगाएंगे ई-अटेंडेंस
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर खुद भी उदाहरण पेश करने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि जब तक वे अपने पद पर रहेंगे, तब तक प्रतिदिन ई-अटेंडेंस दर्ज करेंगे। सोमवार, 17 अगस्त को उन्होंने कार्यालय पहुंचने के बाद अपनी ई-अटेंडेंस दर्ज की। आयुक्त ने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति को सीधे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता से जोड़ते हुए कहा कि यदि शिक्षक निर्धारित समय तक स्कूल में उपलब्ध रहेंगे तो इसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा परिणाम पर भी देखने को मिल सकता है।
सरकार का फोकस डिजिटल अटेंडेंस के साथ जवाबदेही पर
मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में ई-अटेंडेंस लागू करने का उद्देश्य केवल उपस्थिति दर्ज करना नहीं, बल्कि शिक्षकों की स्कूल में उपलब्धता और जवाबदेही को भी बेहतर बनाना है। डिजिटल व्यवस्था के जरिए उपस्थिति का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है, जिससे स्कूल स्तर पर शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी करना आसान हो सकता है। अब तकनीकी स्तर पर CAPTCHA और सर्वर क्षमता बढ़ाने जैसे बदलाव किए जाने के बाद विभाग का प्रयास है कि अटेंडेंस सिस्टम अधिक स्थिर तरीके से काम करे। वहीं शिक्षकों को ग्रेस पीरियड दिए जाने से वास्तविक परिस्थितियों में होने वाली मामूली देरी को भी ध्यान में रखा गया है।
शिक्षकों के लिए नई व्यवस्था में क्या ध्यान रखना जरूरी है?
ई-अटेंडेंस दर्ज करने वाले शिक्षकों को निर्धारित समय का ध्यान रखना होगा। उपस्थिति दर्ज करते समय CAPTCHA में पूछे गए सवाल का सही जवाब देना जरूरी होगा। यदि किसी कारण से देरी होती है तो संबंधित प्राचार्य को समय पर सूचना देना जरूरी होगा। साथ ही शिक्षकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि 15 मिनट का ग्रेस पीरियड नियमित देरी की अनुमति के तौर पर नहीं देखा जाए। विभाग की व्यवस्था का मूल उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर बनाना है।