ओडिशा: उत्तरी ओडिशा में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। बैतरणी, सालंदी, बुढ़ाबलंग और सुवर्णरेखा समेत कई नदियां उफान पर हैं। कई जगह नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर जाजपुर, भद्रक, बालासोर, मयूरभंज, केंद्रापड़ा और क्योंझर जिलों में देखने को मिल रहा है। प्रशासन के मुताबिक करीब 7.85 लाख लोग बाढ़ से सीधे प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों गांवों में पानी घुस गया है और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। हालात को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
बैतरणी नदी ने पार किया खतरे का निशान
बाढ़ के बीच बैतरणी नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। नदी सोमवार को ही अपने खतरे के निशान को पार कर चुकी थी। अखुआपाड़ा में बैतरणी नदी का जलस्तर खतरे के निशान 18.33 मीटर के मुकाबले बढ़कर 19.25 मीटर तक पहुंच गया है। वहीं क्योंझर जिले के पटना में नदी का जलस्तर 311.10 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर 311.22 मीटर दर्ज किया गया है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। राहत दल भी संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सालंदी नदी का भी बढ़ा जलस्तर
भद्रक जिले में सालंदी नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। राजघाट में सालंदी नदी का जलस्तर 17 फीट के खतरे के निशान के मुकाबले 18.10 फीट दर्ज किया गया है। नदी का पानी बढ़ने से आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। भंडारिपोखरी प्रखंड के सोलमपुर में सड़क पर दो फीट से अधिक पानी बह रहा है। इसके चलते लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अन्नपाल पंचायत के राजा मुकुंदपुर पुल पर भी पानी आ गया है। पुल पर पानी आने के बाद कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है और स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
6 जिलों में 7.85 लाख लोग प्रभावित
उत्तरी ओडिशा में बाढ़ का असर बड़े स्तर पर देखने को मिल रहा है। राज्य के छह प्रमुख जिले इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित बताए जा रहे हैं। इनमें जाजपुर, भद्रक, बालासोर, मयूरभंज, केंद्रापड़ा और क्योंझर शामिल हैं। करीब 7.85 लाख लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कई गांवों में पानी भरने के कारण लोगों के सामान्य जीवन पर असर पड़ा है। खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। जलस्तर पर लगातार निगरानी रखते हुए जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।
मौसम विभाग का रेड अलर्ट, कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच मौसम विभाग ने भी कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। बालासोर, भद्रक, मयूरभंज और क्योंझर में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कटक, पुरी, खोरधा और संबलपुर के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने की अपील की है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने किया हवाई और जमीनी दौरा
बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। दोनों ने जाजपुर और भद्रक में हवाई और जमीनी स्तर पर हालात का निरीक्षण किया। इस दौरान राहत और बचाव कार्यों की स्थिति की जानकारी ली गई। अधिकारियों से प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने को लेकर चर्चा की गई। प्रशासन को बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को तेज रखने के निर्देश दिए गए हैं। खासकर जलभराव वाले गांवों में लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखने की बात कही गई है।
पेयजल और स्वास्थ्य व्यवस्था पर विशेष जोर
बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में पीने का साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं। लोगों को पानी को शुद्ध करने के लिए जल शोधन की गोलियां भी बांटी जा रही हैं। प्रशासन की कोशिश है कि दूषित पानी के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों को रोका जा सके। बाढ़ के पानी में सांपों के निकलने की आशंका को देखते हुए सर्पदंश के इलाज के लिए विषरोधी दवाएं भी तैयार रखी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों से भी साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल का इस्तेमाल करने की अपील की गई है।
मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह
ओडिशा तट और बंगाल की खाड़ी में मौसम खराब रहने की आशंका के बीच मछुआरों के लिए भी चेतावनी जारी की गई है। समुद्र में उथल-पुथल की स्थिति को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सख्त सलाह दी गई है। प्रशासन ने मछुआरों से मौसम सामान्य होने तक तटीय इलाकों में ही रहने की अपील की है। खराब मौसम के दौरान समुद्र में ऊंची लहरें और तेज हवाएं खतरा पैदा कर सकती हैं। ऐसे में किसी भी तरह का जोखिम न लेने की सलाह दी गई है। प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी होने वाली नई चेतावनियों पर नजर रखने को कहा गया है। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा और राहत कार्यों को तेज करना है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
उत्तरी ओडिशा में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है। कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर खेतों में पानी भरने से कृषि क्षेत्र को भी नुकसान की आशंका है। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण आने वाले समय में स्थिति पर लगातार निगरानी जरूरी है। प्रशासन ने राहत और बचाव दलों को सक्रिय रखा है। प्रभावित इलाकों में पेयजल, स्वास्थ्य और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। फिलहाल सभी की नजर मौसम और नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है।