जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में सरकारी स्कूलों के खराब परीक्षा परिणाम को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। कक्षा 8वीं की बोर्ड परीक्षा में 10 प्रतिशत या उससे कम रिजल्ट देने वाले शासकीय स्कूलों के संबंधित शिक्षकों का वार्षिक इंक्रीमेंट रोक दिया गया है। मार्च में जारी हुए कक्षा 8वीं के परीक्षा परिणामों में जबलपुर जिले का प्रदर्शन प्रदेश के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल रहा था। खराब परिणाम सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूलों के शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई
विभाग के मुताबिक, नोटिस के जवाब में शिक्षकों की ओर से संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके बाद मामले में लापरवाही सामने आने पर विभाग ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का फैसला लिया। इस कार्रवाई के दायरे में पांच शासकीय स्कूलों के शिक्षक आए हैं।
नारायणपुर स्कूल का रिजल्ट सिर्फ 9 प्रतिशत
कक्षा 8वीं के परिणामों में जिले के कुछ स्कूलों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। नारायणपुर माध्यमिक शाला का परीक्षा परिणाम महज 9 प्रतिशत दर्ज किया गया था। खराब परिणाम के कारण स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था और शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। विभाग ने पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया और जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद इंक्रीमेंट रोकने की कार्रवाई की।
इन 5 स्कूलों के शिक्षकों पर गिरी गाज
शिक्षा विभाग की कार्रवाई जिन शासकीय स्कूलों के शिक्षकों के खिलाफ की गई है, उनमें शामिल हैं:
- शम्मो खान माध्यमिक स्कूल
- शासकीय माध्यमिक शाला अंधुआ
- शासकीय माध्यमिक शाला बढ़ियाखेड़ा
- उच्चतर माध्यमिक शाला गढ़ा
- शासकीय माध्यमिक शाला सिलपुरी
प्रदेश के खराब प्रदर्शन वाले जिलों में था जबलपुर
कक्षा 8वीं की परीक्षा के परिणामों में जबलपुर जिला प्रदेश के पांच सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल रहा था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने कमजोर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों की समीक्षा की।
विभाग का यह कदम सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और परीक्षा परिणाम बेहतर करने की दिशा में सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। शिक्षा विभाग की कार्रवाई से शिक्षकों के बीच भी यह संदेश गया है कि लगातार खराब परिणाम और लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।