भोपाल में मंगलवार, 18 अगस्त को तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मंत्रालय के पास बड़ी संख्या में जुटे कर्मचारियों ने सरकार के सामने अपनी पांच सूत्रीय मांगें रखीं। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने CPCT की अनिवार्यता खत्म करने, कैशलेस इलाज, महंगाई भत्ता, महंगाई राहत और ई-अटेंडेंस से जुड़े मुद्दे उठाए। कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।
मंत्रालय के पास कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन से जुड़े कर्मचारी मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर भोपाल में मंत्रालय के पास एकत्र हुए। कर्मचारियों ने सरकार से लंबित मांगों का जल्द निराकरण करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी नेताओं ने कहा कि लंबे समय से कई मुद्दों को सरकार के सामने रखा जा रहा है, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं होने के कारण कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी भी की और सरकार से कर्मचारी हित में जल्द निर्णय लेने की अपील की।
CPCT की अनिवार्यता खत्म करने की मांग
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में CPCT यानी कंप्यूटर दक्षता प्रमाण-पत्र परीक्षा की अनिवार्यता खत्म करना शामिल है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण कई कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित हो रही है। कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी के मुताबिक CPCT की शर्त के चलते कुछ कर्मचारियों के प्रमोशन अटक रहे हैं। कर्मचारियों का यह भी दावा है कि कुछ मामलों में सेवा से जुड़े मामलों पर भी इसका असर पड़ रहा है। इसी वजह से संगठन चाहता है कि सरकार CPCT की अनिवार्यता को लेकर दोबारा विचार करे और कर्मचारियों के हित में रास्ता निकाले।
कैशलेस इलाज की भी मांग
कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी मांग भी प्रदर्शन के दौरान उठाई। संगठन की ओर से सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई। कर्मचारियों का कहना है कि इलाज के दौरान होने वाले खर्च और प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है। संगठन चाहता है कि सरकार इस विषय पर स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था लागू करे।
महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का मुद्दा भी उठाया
प्रदर्शन में कर्मचारियों ने महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) से संबंधित मांगों को भी प्रमुखता से रखा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े आर्थिक लाभों पर सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए। संगठन ने सरकार से लंबित मामलों पर स्पष्टता लाने और कर्मचारियों की आर्थिक मांगों का समाधान करने की अपील की है।
ई-अटेंडेंस को लेकर भी नाराजगी
तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपत्तियां सरकार के सामने रखीं। कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने से पहले कर्मचारियों की व्यावहारिक परेशानियों और तकनीकी दिक्कतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। कर्मचारी संगठन चाहता है कि ई-अटेंडेंस से जुड़ी व्यवस्था ऐसी हो, जिसमें तकनीकी समस्या या अन्य वास्तविक परिस्थितियों के कारण कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार से जल्द फैसले की मांग
प्रदर्शन के दौरान संगठन ने अपनी मांगों को लेकर सरकार से जल्द कार्रवाई की अपील की। कर्मचारियों का कहना है कि ये मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं और अब इन पर ठोस निर्णय की जरूरत है।
संगठन की ओर से उठाए गए प्रमुख मुद्दों में:
CPCT की अनिवार्यता खत्म करना
कैशलेस इलाज की सुविधा
महंगाई भत्ते से जुड़े मुद्दों का समाधान
महंगाई राहत से संबंधित मांगों पर निर्णय
ई-अटेंडेंस व्यवस्था में कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान शामिल हैं।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा तेज
कर्मचारी नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान सरकार को आंदोलन की चेतावनी भी दी। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन को और व्यापक करेगा। कर्मचारी संगठन ने सरकार से बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की है। साथ ही संकेत दिया है कि मांगों की अनदेखी होने पर आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर पर आंदोलन का स्वरूप बड़ा किया जा सकता है।
कर्मचारी संगठनों की नजर सरकार के फैसले पर
भोपाल में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब कर्मचारियों की नजर सरकार की ओर से आने वाले फैसले पर है। खास तौर पर CPCT की अनिवार्यता, प्रमोशन से जुड़े मामलों और ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर कर्मचारी संगठन सरकार से जल्द पहल की उम्मीद कर रहा है। यदि सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो आंदोलन टल सकता है, लेकिन मांगों पर प्रगति नहीं होने की स्थिति में कर्मचारी संगठन के आंदोलन को आगे बढ़ाने की संभावना जताई गई है।