भोपाल। 'आज का पत्रकार फेक न्यूज की जगह नेक न्यूज की आदत डाले। मैं इतना निवेदन करता हूं। हम सनसनी तो लाएं, सत्य तो लाएं, साहस भी जुटाएं। आप लोक सत्ता के विरोधी हो सकते हैं, सत्ता के विरोधी हो सकते हैं, उसमें कोई संकट की बात नहीं। लेकिन, देशहित का ख्याल रखिए।' यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 अगस्त को माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में कही। सीएम डॉ. यादव तीन दिवसीय स्त्रारंभ 'अभ्युदय2026' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने मां सरस्वती, भारत माता और दादा माखनलाल चतुर्वेदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने विश्वविद्यालय के प्रकाशनों "दो सदी साक्षी", "मैं न्यूज़ रूम" और भारत की टेंपल इकोनॉमी पर केंद्रित जरनल "इंडियन कलाईडोस्कोप" का विमोचन किया। उन्होंने विश्व विद्यालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी "100 साल से 100 सुर्खियां" का अवलोकन किया। इस मौके पर विख्यात लेखक-कलाकार पीयूष मिश्रा भी मौजूद थे। मिश्रा ने कहा कि भोपाल अद्भुत है। यह सबसे ज्यादा सुरक्षित शहर है। मैं बहुत सालो पहले भोपाल आया करता था। मेरी यादों में भारत भवन बसा हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों परिधि पुजारी, तमन्ना लश्कर और शिविका गुप्ता का उनकी उपलब्धियां के लिए सम्मान किया, उन्हें अलंकरण प्रदान किए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि माखन लाल विश्वविद्यालय की स्थापना को 36 साल हो गए। लेकिन, आज तक किसी विद्यार्थी का आपस में 36 का आंकड़ा नहीं है। यहां सभी का प्रेम का संबंध है। इस विश्वविद्यालय की साख और धाक दोनों अच्छी हैं। आज सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया है। मीडिया का अहसास हजारों साल से होता आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया को भगवान राम के काल से जोड़ा। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में भगवान राम के दो बेटे हुए। लेकिन, उस समय मीडिया नहीं थी, तो बच्चों का पिता से परिचय कैसे कराएं। ये बड़ी चुनौती थी। उस वक्त महर्षि वाल्मीकि के ध्यान में आया कि बच्चों को रामायण सुनाई जाए। बच्चों को संगीतमय रामायण कंठस्थ कराने के बाद उन्हें अयोध्या पहुंचाया गया। उसके बाद बच्चों ने जनता के जरिये अपनी बात अयोध्या तक पहुंचाई। यह भी पत्रकारिता का एक माध्यम रहा होगा। उन्होंने कहा कि इसी तरह भगवान श्री कृष्ण के काल में भविष्यवाणी भी पत्रकारिता का माध्यम रहा होगा। पत्रकारिता का संबंध नारद देव से जोड़ा जाता है। उस वक्त नारद से पूछा गया होगा कि आपने भगवान कृष्ण के भाइयों को मरवाने का काम क्यों किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेरे अनुसार नारद ने कहा होगा कि भगवान इतनी आसानी से जन्म नहीं लेते। अगर कंस एक ही बच्चे को मारता तो हो सकता है कि उसकी क्रूरता दब जाती। इसलिए कंस के चरित्र को बाहर लाने के लिए एक रचना बनाई गई। उसके बाद कंस का अत्याचार बढ़ता देख जनता ने ही ईश्वर से अवतार लेने की प्रार्थना की होगी और श्री कृष्ण ने अवतार लिया।
वीर सावरकर ने बताई पत्रकार की भूमिका

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीर सावरकर ने आजादी के पहले बता दिया था कि पत्रकार की भूमिका क्या होती है। लंदन में पढ़ने के साथ-साथ वो बड़ा काम करते हैं। वो सोचते हैं कि 1857 के आजादी के संघर्ष का सही पक्ष सबके सामने आना चाहिए। वे लंदन के सबसे शक्तिशाली क्षेत्र में जाकर इस बात को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक पत्रकार की ही हिम्मत हो सकती है कि वह इतने प्रभावित क्षेत्र में इस तरह की बात छापे और बताए कि 1857 का युद्ध स्वतंत्रता संग्राम का समर है, ये कोई विद्रोह नहीं है। वीर सावरकर को दो-दो बार कालापानी की सजा हुई। वीर सावरकर में आंतरिक शक्ति गजब की थी। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर ने हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने का प्रयास किया।
आपातकाल में अखबारों ने जगाई अलख

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपातकाल के वक्त समाचार पत्रों ने अपना पहला पन्ना खाली रखकर संघर्ष की अलख जगाई। आपातकाल का विरोध किया। इस संघर्ष की वजह से दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत विश्व के सामने खड़ा है। उन्होंने कहा लेखक-कलाकार पीयूष मिश्रा का 'आरंभ है प्रचंड...हमें गौरवांवित करता है। मध्यप्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है कि आजादी के पहले उज्जैन के कवि प्रदीप ने राज्य को गौरवांवित किया। वे एकमात्र कवि थे जिन्हें अंग्रेजों ने सजा सुनाई। हमारे पत्रकार-साहित्यकार उस वक्त डरे नहीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए इसी मार्ग की आवश्यकता भी है।
विकास के लिए संकल्पित सरकार
कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित अभ्युदय कार्यक्रम में पधारे पत्रकार, साहित्यकार ,कलाकार सबका मैं स्वागत करता हूं। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय देश ही नहीं बल्कि दुनिया का प्रतिष्ठित संस्थान है। इसके विकास के लिए हमारी सरकार संकल्पित है।