देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है और इसका असर उत्तर भारत से लेकर पूर्वी तथा मध्य भारत तक दिखाई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उससे सटे पश्चिम बंगाल तथा उत्तरी ओडिशा के तटीय क्षेत्र में बना निम्न दबाव क्षेत्र आगे बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से पूर्वी भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बनी है। मौसम विभाग ने ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में तेज बारिश को लेकर विशेष चेतावनी दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधि पूरी तरह थमती नजर नहीं आ रही है और कई क्षेत्रों में जलभराव तथा बाढ़ जैसी स्थिति और गंभीर हो सकती है।
18 अगस्त को कई राज्यों में भारी बारिश का खतरा
मौसम विभाग के 17 अगस्त के ताजा अखिल भारतीय मौसम बुलेटिन के मुताबिक 18 अगस्त को उत्तर भारत के साथ-साथ देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में बारिश की गतिविधि बनी रहने की संभावना है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में व्यापक वर्षा की संभावना जताई गई है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 18 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 और 19 अगस्त को भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में 18 अगस्त को बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी वर्षा गतिविधि को लेकर चेतावनी दी है।
दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहेंगे, हल्की बारिश के आसार
दिल्ली-एनसीआर में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद मौसम में बदलाव जारी है। 18 अगस्त को राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में आसमान में बादल छाए रहने तथा बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन में 17 और 18 अगस्त के दौरान हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके बाद भी 21 अगस्त को इन क्षेत्रों में फिर भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में लोगों को अगले कुछ दिनों तक उमस के बीच बीच-बीच में बारिश और बादलों का सामना करना पड़ सकता है। बारिश के दौरान निचले इलाकों, यातायात मार्गों और जलभराव वाले स्थानों पर विशेष सावधानी जरूरी होगी।
उत्तर प्रदेश में दो चरणों में तेज बारिश के संकेत
उत्तर प्रदेश के लिए मौसम विभाग ने अगले कई दिनों तक बारिश की गतिविधि जारी रहने का संकेत दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 18 अगस्त को कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 और 19 अगस्त के अलावा 22 और 23 अगस्त को भी भारी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। इतना ही नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 और 22 अगस्त को भी भारी बारिश की संभावना है। इसका मतलब है कि प्रदेश के दोनों हिस्सों में बारिश की गतिविधि एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग चरणों में तेज हो सकती है। लगातार बारिश की स्थिति में पहले से जलभराव वाले इलाकों में परेशानी बढ़ने के साथ नदियों और जलाशयों के जलस्तर पर भी असर पड़ सकता है।
ओडिशा में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति से चिंता
पूर्वी भारत में ओडिशा मौजूदा मौसम प्रणाली से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 16 और 17 अगस्त को ओडिशा में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई थी, जबकि व्यापक क्षेत्र में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान दिया गया था। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के कारण ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधि तेज हुई है। भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की स्थिति बन सकती है। राज्य में पहले से बाढ़ जैसे हालात वाले क्षेत्रों के लिए आने वाले दिनों की बारिश अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकती है।
झारखंड और बिहार में भी मौसम रहेगा सक्रिय
झारखंड में भी मौजूदा मौसम प्रणाली का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बंगाल की खाड़ी से उठे निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव में झारखंड में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई थी और अगले कुछ दिनों तक वर्षा गतिविधि बनी रहने का अनुमान है। बिहार में भी पूर्वी भारत की इस मौसम प्रणाली का असर पहुंच रहा है। भारी बारिश के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने, निचले इलाकों में जलजमाव और स्थानीय नदियों के जलस्तर में वृद्धि की स्थिति बन सकती है। बिहार और झारखंड के लोगों के लिए विशेष रूप से स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि मानसूनी बारिश के दौरान कम समय में तेज वर्षा होने से परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।
उत्तर भारत में भी लगातार बनी रहेगी वर्षा गतिविधि
उत्तर भारत में हिमालयी राज्यों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक बारिश की गतिविधि आने वाले दिनों में बनी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में 17 से 20 अगस्त के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। हिमाचल प्रदेश में 19 से 21 अगस्त के दौरान भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है, जबकि उत्तराखंड में 18 से 23 अगस्त तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश होने पर भूस्खलन, सड़क अवरोध और अचानक जलप्रवाह बढ़ने जैसी स्थानीय समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों को ध्यान में रखना चाहिए।
मध्य भारत में भी बारिश का दौर जारी
मौसम विभाग के अनुसार मध्य भारत में भी मानसूनी गतिविधि कम होने के संकेत नहीं हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 17 से 21 अगस्त और पूर्वी मध्य प्रदेश में 17 से 23 अगस्त तक कई स्थानों पर बारिश की संभावना बनी हुई है। विदर्भ में भी 17 और 18 अगस्त तथा बाद में 21 से 23 अगस्त के दौरान बारिश की गतिविधि बढ़ सकती है। मध्य भारत में लगातार वर्षा होने पर कृषि क्षेत्रों में मिट्टी की नमी बढ़ने के साथ जलभराव की समस्या भी सामने आ सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है, इसलिए खुले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम खराब होने पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा
भारी बारिश के अलावा कई राज्यों में गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका भी मौसम चेतावनी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसून के दौरान बादलों के तेजी से विकसित होने पर कुछ स्थानों पर अचानक तेज गर्जना, बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। ऐसे मौसम में खेतों, खुले मैदानों, जलाशयों और पेड़ों के नीचे खड़े रहने से बचना चाहिए। बिजली गिरने की आशंका होने पर पक्के भवन के भीतर रहना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प होता है। मौसम विभाग के बुलेटिन में कई क्षेत्रों में आंधी और बिजली के साथ वर्षा की संभावना को लेकर चेतावनी दी गई है, इसलिए केवल बारिश की मात्रा नहीं बल्कि आकाशीय बिजली के खतरे को भी गंभीरता से लेना जरूरी है।
अगले कुछ दिन देश के कई हिस्सों के लिए अहम
मौजूदा मौसम परिस्थितियों को देखते हुए 18 अगस्त के बाद भी बारिश की गतिविधि कई क्षेत्रों में जारी रहने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 22 और 23 अगस्त को फिर भारी बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 और 22 अगस्त को बारिश तेज हो सकती है। उत्तराखंड में 18 से 23 अगस्त तक और हिमाचल प्रदेश में 19 से 21 अगस्त के दौरान बारिश का दौर बना रह सकता है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भी 21 अगस्त को फिर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम पूरी तरह स्थिर रहने की उम्मीद कम है और लोगों को स्थानीय पूर्वानुमान के आधार पर अपनी यात्रा तथा दैनिक गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए।
प्रशासन और आम लोगों को क्यों रहना होगा सतर्क?
लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती जलभराव, नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर और यातायात व्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव की होती है। शहरी क्षेत्रों में भारी बारिश से नालियों और जलनिकासी प्रणालियों पर अचानक दबाव बढ़ सकता है, जबकि ग्रामीण और नदी किनारे के क्षेत्रों में बाढ़ का जोखिम अधिक हो सकता है। प्रशासन के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, जलनिकासी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण होगा। आम लोगों को भी जलभराव वाले रास्तों में जाने, तेज बहाव वाली नदियों या नालों के पास जाने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचना चाहिए। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा स्थानीय पूर्वानुमान को नियमित रूप से देखना इस मानसूनी दौर में सबसे उपयोगी सावधानी होगी।