नई दिल्ली - सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच फर्जी, भ्रामक और अधूरी जानकारी का तेजी से प्रसार सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। गलत जानकारी से लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं और नीतियों को लेकर भी गलत धारणा बन सकती है। इसी समस्या से निपटने के लिए अब विभिन्न सरकारी विभागों में क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को सक्रिय किया जा रहा है।
अफवाहों की तुरंत होगी पहचान
इन टीमों का मुख्य काम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विभाग से संबंधित पोस्ट, वीडियो और अन्य सामग्री पर नजर रखना होगा। किसी पोस्ट में गलत तथ्य, छेड़छाड़की गई जानकारी या भ्रामक दावा सामने आने पर टीम उसकी जांच करेगी और सही जानकारी जनता तक पहुंचाने की कोशिश करेगी।
दो घंटे के भीतर जवाब देने की तैयारी
सरकारी स्तर पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत किसी महत्वपूर्ण भ्रामक पोस्ट का तथ्यात्मक जवाब करीब दो घंटे के भीतर दिया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया पर गलत सूचना जितनी तेजी से फैलती है, उतनी ही तेजी से उसका सही पक्ष सामने रखना जरूरी है।
कई विभागों में बन चुकी हैं टीमें
जानकारी के मुताबिक, बिजली, कृषि और वाणिज्य समेत कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों और विभागों ने ऐसी विशेष टीमों का गठन शुरू कर दिया है। इनका उद्देश्य संबंधित विभाग की योजनाओं, नीतियों, कार्यक्रमों और फैसलों से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों की नियमित निगरानी करना है।
PIB फैक्ट चेक यूनिट से होगा समन्वय
मामले की तथ्य-जांच को मजबूत बनाने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमें PIB फैक्ट चेक यूनिट के साथ भी समन्वय करेंगी। इससे किसी दावे की सत्यता जांचने और आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। वहीं, यदि मामला बेहद संवेदनशील हो, उसमें कानूनी पहलू जुड़े हों या किसी सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान की आशंका हो, तो उसे संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
डिजिटल दौर में तेजी से प्रतिक्रिया जरूरी
सोशल मीडिया पर किसी अफवाह के वायरल होने में कुछ ही मिनट लगते हैं। ऐसे में सरकारी विभागों की यह पहल गलत सूचना के प्रभाव को कम करने में मददगार हो सकती है। हालांकि, तथ्य-जांच के साथ यह भी जरूरी होगा कि आधिकारिक जवाब स्पष्ट, प्रमाणित और समय पर जारी किए जाएं। कुल मिलाकर, क्विक रिस्पॉन्स टीमों के जरिए सरकार सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सामग्री की निगरानी और उसके तथ्यात्मक खंडन की व्यवस्था को अधिक तेज बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे नागरिकों तक सरकारी नीतियों और योजनाओं से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है।