रायपुर, 17 अगस्त 2026 | योग गुरु बाबा रामदेव ने रायपुर में बच्चों और युवाओं के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार को रायपुर पहुंचे बाबा रामदेव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या कोई अन्य समुदाय खतरे में नहीं है। उनके मुताबिक वास्तविक चिंता देश के बचपन, युवाओं, वर्तमान और भविष्य को लेकर होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों में छोटे बच्चों को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। रामदेव ने कहा कि बच्चों की पहली प्राथमिकता पढ़ाई और उनका सुरक्षित भविष्य होना चाहिए। उन्हें ऐसे राजनीतिक या सामाजिक संघर्षों में नहीं उतारा जाना चाहिए, जिनके अर्थ और परिणाम समझने की उम्र अभी उनकी नहीं है।
‘बच्चा आंदोलन में जाएगा तो पढ़ेगा कब?’
बाबा रामदेव ने सवाल उठाया कि प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को सड़क, थाने के घेराव या किसी आंदोलन में धकेला जाएगा तो उन्हें शिक्षा कब मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य के साथ इस तरह का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। रामदेव ने कहा कि विरोध करने और अपनी मांग रखने का अधिकार लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन छोटे बच्चों को उसका साधन बनाना सही नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों और वीडियो में उन्होंने किसी विशेष संगठन या आंदोलन का नाम नहीं लिया, बल्कि सामान्य रूप से बच्चों को प्रदर्शनों में शामिल किए जाने पर चिंता जताई।
‘आंदोलन हों, लेकिन अराजकता नहीं’
योग गुरु ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आंदोलन किए जा सकते हैं, लेकिन उनका स्वरूप संवैधानिक और शांतिपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने आंदोलनों को लोकतांत्रिक, नैतिक, मानवीय और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के नाम पर अराजकता नहीं फैलनी चाहिए और किसी भी सामाजिक या राजनीतिक उद्देश्य के लिए बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। रामदेव के अनुसार, आंदोलन का तरीका ऐसा हो, जिससे शिक्षा, सामाजिक व्यवस्था और बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो।
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
बाबा रामदेव ने देश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों से जुड़े कई गंभीर सवाल हैं, जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है। उनके मुताबिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकारों की बड़ी जिम्मेदारी है। शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था मजबूत होगी तो बच्चों और युवाओं का भविष्य भी अधिक सुरक्षित होगा।
‘एक पार्टी नहीं बदल सकती पूरा सिस्टम’
रामदेव ने कहा कि देश की पूरी व्यवस्था बदलने की क्षमता किसी एक राजनीतिक दल, विपक्षी समूह या व्यक्ति में नहीं है। इसके लिए सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि बड़े पदों पर बैठे लोगों के साथ समाज और नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता पैदा करें। व्यवस्था में स्थायी बदलाव केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों से आएगा।
युवाओं के आंदोलनों पर पहले भी दिया था बयान
रायपुर के बयान से पहले स्वतंत्रता दिवस पर बाबा रामदेव ने सरकारी भर्तियों, पेपर लीक और चयन प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं पर भी चिंता जताई थी। उन्होंने सरकारों से भर्ती व्यवस्था की गड़बड़ियां ठीक करने और युवाओं के सवालों का समाधान करने की मांग की थी। उन्होंने उस समय युवा आंदोलनों को व्यवस्था की कमियों का परिणाम बताते हुए चेतावनी दी थी कि समस्याएं दूर नहीं हुईं तो विरोध और बढ़ सकता है। रायपुर में उन्होंने वैध आंदोलन के अधिकार का विरोध नहीं किया, बल्कि छोटे बच्चों को इसमें शामिल करने और प्रदर्शन के अराजक स्वरूप पर आपत्ति जताई।
बाबा रामदेव के बयान के क्या हैं मायने?
रामदेव का बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अलग-अलग राज्यों में भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक, शैक्षणिक व्यवस्था और सरकारी नौकरियों को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके बयान के दो प्रमुख पहलू हैं—युवाओं की समस्याओं का समाधान और छोटे बच्चों को राजनीतिक या सामाजिक आंदोलनों से दूर रखना। उन्होंने एक ओर सरकारों से शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की बात कही, वहीं दूसरी ओर आंदोलन करने वालों से लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की। हालांकि बच्चों को किस उम्र तक प्रदर्शन से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए या किन गतिविधियों को राजनीतिक इस्तेमाल माना जाए, इस पर उन्होंने कोई विस्तृत मानदंड नहीं बताया।
प्रमुख सवाल और जवाब
बाबा रामदेव ने रायपुर में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि देश में कोई धर्म या समुदाय खतरे में नहीं है, बल्कि देश का बचपन, जवानी, वर्तमान और भविष्य चिंता का विषय है।
उन्होंने बच्चों को लेकर क्या आपत्ति जताई?
रामदेव ने छोटे और प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को आंदोलनों, थानों के घेराव और सड़क प्रदर्शनों में शामिल किए जाने को अनुचित बताया।
क्या बाबा रामदेव ने आंदोलनों का विरोध किया?
नहीं। उन्होंने संवैधानिक और लोकतांत्रिक आंदोलन के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन अराजकता और बच्चों के इस्तेमाल का विरोध किया।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर उन्होंने क्या कहा?
उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों के समाधान की जरूरत बताई और कहा कि इन्हें सही दिशा देना सरकारों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
क्या उन्होंने किसी विशेष आंदोलन का नाम लिया?
उपलब्ध वीडियो और मीडिया रिपोर्टों में उन्होंने किसी खास संगठन या आंदोलन का नाम नहीं लिया। उनका बयान सामान्य रूप से आंदोलनों में बच्चों की भागीदारी को लेकर था।