ग्वालियर। अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास के संचालन को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब मंदिर की व्यवस्थाएं जिला प्रशासन ने अपने हाथों में ले ली हैं। रविवार को प्रशासनिक अधिकारियों की टीम अचलनाथ दरबार पहुंची और तीन घंटे से अधिक समय तक मंदिर की व्यवस्थाओं, रिकॉर्ड और दानपेटियों की जानकारी ली। प्रशासन ने दानपेटियों को अपनी सील से बंद कर दिया है। अब इन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिकारियों की मौजूदगी में ही खोला जाएगा। एडीएम सीबी प्रसाद, लश्कर एसडीएम नरेंद्रबाबू यादव समेत अन्य अधिकारियों ने मंदिर पहुंचकर पूर्व व्यवस्थापकों से भी आवश्यक जानकारी ली।
चुनाव होने तक प्रशासन संभालेगा व्यवस्था
कोर्ट के निर्देश के बाद अब अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास की व्यवस्थाएं लोक न्यास पंजीयक और जिला प्रशासन की निगरानी में रहेंगी। चुनाव होने तक प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के अधिकारी मंदिर की व्यवस्था संभालेंगे। पूर्व जस्टिस एनके मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी को हटा दिया गया है। बताया गया है कि कोर्ट के निर्देश के तहत वर्ष 2005 के आदेश के अनुरूप व्यवस्था लागू की जा रही है। अचलेश्वर मंदिर मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
दानपेटियों से लेकर बैंक खातों तक प्रशासन की निगरानी
नवम जिला न्यायाधीश ग्वालियर की अदालत ने अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास के संचालन और चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने मंदिर में आने वाले दान और न्यास के बैंक खातों की निगरानी प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए हैं। अदालत के निर्देश के मुताबिक मंदिर में प्रतिदिन आने वाला दान दानपेटियों में एकत्र किया जाएगा। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में दानपेटियों को सील किया जाएगा। किसी अन्य व्यक्ति को दानपेटियां खोलने की अनुमति नहीं होगी। निर्धारित समय पर अधिकारियों की मौजूदगी में दानपेटियां खोली जाएंगी और प्राप्त राशि मंदिर न्यास के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी।
मंदिर के सभी बैंक खातों पर भी प्रशासन की नजर
कोर्ट ने अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास के अलग-अलग बैंकों में संचालित सभी खातों को प्रशासन की निगरानी में संचालित कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सक्षम अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। मंदिर के जरूरी खर्चों का विवरण लेखा पुस्तिका में दर्ज करना होगा। इसके साथ ही मंदिर की आय-व्यय से जुड़े सभी अभिलेख भी प्रशासन अपने कब्जे में लेगा, ताकि रिकॉर्ड में किसी तरह की अनधिकृत या अवांछित प्रविष्टि न की जा सके।
हर 15 दिन में कोर्ट को देनी होगी रिपोर्ट
अदालत ने लोक न्यास पंजीयक और कलेक्टर ग्वालियर को मंदिर के लेखा-जोखा से संबंधित प्रतिवेदन प्रत्येक 15 दिन में अदालत और मामले के पक्षकारों के अवलोकन के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह अंतरिम आदेश तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा।
चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश
मंदिर न्यास के संचालन को लेकर दोनों पक्षों की ओर से चुनाव कराने की आवश्यकता जताई गई थी। अदालत ने उच्च न्यायालय के 15 जून 2026 के आदेश का अवलोकन करते हुए कहा कि पूर्व में दिया गया आदेश निरस्त किया जा चुका है और न्यास का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए जल्द चुनाव कराना आवश्यक है। याचिकाकर्ता संतोष राठौर ने कहा कि मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की प्रक्रिया अब शुरू हो गई है।
अधिकारियों की नियमित निगरानी रहेगी
एडीएम सीबी प्रसाद के मुताबिक कोर्ट के निर्देश पर अचलेश्वर न्यास की व्यवस्थाएं प्रशासन ने अपने अधीन ले ली हैं। चुनाव होने तक प्रशासन, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी व्यवस्था देखेंगे। अधिकारियों की नियमित विजिट भी जारी रहेगी।