चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा के खनौरी बॉर्डर पर रविवार रात किसानों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। दिल्ली कूच के आह्वान के बाद पंजाब की तरफ से किसानों का एक समूह पैदल दिल्ली की ओर बढ़ने पहुंचा, लेकिन हरियाणा पुलिस ने बॉर्डर पर रास्ता रोक दिया। आगे जाने की अनुमति नहीं मिलने के बाद किसान सड़क पर ही रुक गए और वहीं बिस्तर लगाकर रात गुजारी। किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर आगे बढ़ने की अनुमति देने की मांग की।
शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाने की बात
किसान नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी तरह का टकराव पैदा करना नहीं है। वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि आधी रात के बाद भी किसान सड़क किनारे सो रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल सीमित संख्या में किसान खनौरी पहुंचे हैं और पैदल दिल्ली की ओर बढ़ने की योजना है। डल्लेवाल के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर उनका गैर-राजनीतिक संगठन बड़ी संख्या में किसानों को यहां जुटा सकता है, लेकिन फिलहाल आंदोलन को सीमित संख्या में किसानों के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
बॉर्डर पर क्यों रोके गए किसान?
किसान नेताओं के अनुसार, जब किसान पैदल आगे बढ़ने लगे तो हरियाणा पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी खनौरी बॉर्डर पर ही रुक गए। डल्लेवाल ने हरियाणा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसानों को शांतिपूर्वक आगे जाने की अनुमति देने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों का हरियाणा सरकार के साथ कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है और उनका आंदोलन अपनी मांगों को लेकर है।
MSP की कानूनी गारंटी समेत कई मांगें
किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी को अपनी प्रमुख मांग बताया है। इसके अलावा किसानों की ओर से:
- किसानों की कर्जमाफी
- स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना
- किसानों की अन्य लंबित मांगों पर सरकार की कार्रवाई
- की मांग भी उठाई जा रही है। डल्लेवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से भी उम्मीद
किसान नेता ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी मामले का संज्ञान लेकर आगे का रास्ता स्पष्ट कर सकते हैं। फिलहाल खनौरी बॉर्डर पर किसानों और पुलिस के बीच स्थिति पर नजर बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं, जबकि पुलिस की ओर से बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई है।