कोलकाता/चोपड़ा: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बीच केंद्रीय बलों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा और मुर्शिदाबाद के डोमकल से डराने-धमकाने और मारपीट की खबरें सामने आई हैं।
चोपड़ा: 'भाजपा को वोट दो' कहने का आरोप
चोपड़ा विधानसभा क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि झड़ीमन नशा नाम की एक बुजुर्ग महिला अपने भतीजे के साथ वोट डालने बूथ पर गई थीं। आरोप है कि वहां तैनात केंद्रीय बल के जवानों ने उन पर भाजपा (BJP) के पक्ष में मतदान करने का दबाव बनाया। जब महिला ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वोट देना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, तो कथित तौर पर जवानों ने महिला और उनके भतीजे की बेरहमी से पिटाई कर दी। घटना में दोनों घायल हुए हैं।
डोमकल: सड़कों पर खून के धब्बे और दहशत
मुर्शिदाबाद के डोमकल में स्थिति और भी चिंताजनक रही। रायपुर गांव के मतदाताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें मतदान केंद्र जाने से रोका जा रहा है।
रात भर हुई हिंसा: मतदान से पहले वाली रात को इलाके में भारी संघर्ष हुआ, जिसके निशान सुबह सड़कों पर 'खून के धब्बों' के रूप में देखे गए। एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है।
हथियारों का डर: ग्रामीणों का आरोप है कि तृणमूल समर्थित उपद्रवियों ने उन्हें हथियार दिखाकर धमकाया कि यदि वे वोट डालने गए तो उन्हें अंजाम भुगतना होगा।
पुलिस और सुरक्षा बल पर सवाल: ग्रामीणों का दावा है कि शिकायत के बावजूद केंद्रीय बल और पुलिस समय पर नहीं पहुंची। बाद में जब सुरक्षा बल आए, तो ग्रामीणों ने उन पर भी मारपीट का आरोप लगाया।
चुनाव आयोग सख्त, मांगी रिपोर्ट
इन घटनाओं ने चुनाव आयोग की चिंताओं को बढ़ा दिया है। डोमकल में हुई हिंसा और चोपड़ा में केंद्रीय बलों पर लगे आरोपों को लेकर चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन से तत्काल रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा बलों का काम मतदाताओं को सुरक्षा देना है, उन्हें प्रभावित करना या डराना नहीं।
फिलहाल, इन इलाकों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और अतिरिक्त बलों की तैनाती की जा रही है ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।