कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर सोमवार शाम कोलकाता स्थित स्वास्थ्य भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने 23 सूत्री उपलब्धियों का ब्योरा पेश किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के कुछ जिलों और ब्लॉकों में बाल विवाह, टीन-एज प्रेग्नेंसी (कम उम्र में गर्भावस्था) तथा एक के बाद एक कई बच्चों के जन्म की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रति दंपत्ति दो से अधिक बच्चे बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं और इस समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ मिलकर कड़े कदम उठाने पर विचार कर रहा है।
सूती और समशेरगंज जैसे ब्लॉकों में चिंताजनक स्थिति
स्वास्थ्य मंत्री ने मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर बंगाल के कुछ हिस्सों और पश्चिम मेदिनीपुर के कुछ क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि इन इलाकों में बाल विवाह और 10-12 बच्चों को जन्म देने की परंपरा स्वास्थ्य सूचकांक के लिहाज से बेहद खतरनाक है। विशेष रूप से सूती और समशेरगंज जैसे ब्लॉकों में स्थिति काफी चिंताजनक है। मातृ मृत्यु दर की समीक्षा करते समय स्वास्थ्य विभाग ने इन तीनों कारणों को मुख्य जोखिम माना है और जागरूकता फैलाने के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर सख्ती की रणनीति बनाई जा रही है।
अस्पतालों में आयुष सेवाएं और 484 मेडिकल डॉक्टरों की भर्ती
स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में चिकित्सा बुनियादी ढांचे के विस्तार की भी जानकारी दी। अब से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों और जिला अस्पतालों में एलोपैथी के साथ-साथ आयुष (आयुर्वेद व होम्योपैथी) सेवाओं की 'को-लोकेशन' व्यवस्था शुरू की जा रही है, ताकि मरीज अपनी इच्छानुसार डॉक्टर चुन सकें। इसके लिए 484 आयुष मेडिकल अफसरों की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा, राज्य में 975 नई एमबीबीएस सीटें बढ़ाई गई हैं, जिनमें से 475 सरकारी क्षेत्र में हैं।
6 नए मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों का आधुनिकीकरण
राज्य सरकार की योजनाओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि अलीपुरद्वार, सूरी, सिलीगुड़ी, आसनसोल और कालिम्पोंग में 5 नए मेडिकल कॉलेज बनाने की योजना है, जबकि कोलकाता में छठा मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का प्रस्ताव है। सरकारी अस्पतालों में बेड की किल्लत दूर करने के लिए निजी अस्पतालों के साथ समन्वय कर 2,426 बेड की व्यवस्था की गई है, जिसके तहत हाल ही में एसएसकेएम से जादवपुर के केपीसी मेडिकल कॉलेज में मरीज ट्रांसफर करने की मॉक ड्रिल भी की गई।
अन्य प्रमुख योजनाएं
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के भोजन का दैनिक बजट ₹56 से बढ़ाकर ₹110 कर दिया है। इसके साथ ही 24x7 एकीकृत कंट्रोल रूम, 200 नई 102-एम्बुलेंस और 310 मोबाइल मेडिकल यूनिट (जिनमें से 200 कार्यरत हैं) शुरू की जा रही हैं। गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों का एचपीवी टीकाकरण, टीबी-मुक्त भारत अभियान, 458 जन औषधि केंद्र, 100 अमृत फार्मेसी और ब्लॉक स्तर पर एक्स-रे व अल्ट्रासोनोग्राफी सेवाओं का विस्तार भी किया जा रहा है।