कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब स्थानीय निकायों की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कई नगरपालिकाओं में भाजपा के विधायक सीधे तौर पर सफाई, कूड़ा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए तृणमूल के पार्षदों या निकाय प्रमुखों को भाजपा में शामिल होने की जरूरत नहीं पड़ रही।
नगर सेवाओं में भाजपा विधायकों की बढ़ी सक्रियता
राज्य के कई इलाकों में भाजपा विधायक सीधे नगरपालिका अधिकारियों और पार्षदों से संपर्क कर स्थानीय समस्याओं के समाधान पर जोर दे रहे हैं। सफाई व्यवस्था, कूड़ा उठाने और नागरिक सुविधाओं को लेकर लगातार बैठकें और निर्देश दिए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इन निर्देशों का असर भी दिखाई देने लगा है।
बरानगर में सफाई व्यवस्था को लेकर सख्ती
बरानगर क्षेत्र में भाजपा विधायक सजल घोष ने कुछ वार्डों में गंदगी और फैले कूड़े को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद संबंधित जनप्रतिनिधियों को तुरंत सफाई कराने के निर्देश दिए गए। स्थानीय प्रशासन ने भी तेजी से कार्रवाई करते हुए सफाई अभियान चलाया।
दक्षिण दमदम में भाजपा विधायकों और चेयरपर्सन की बैठक
दक्षिण दमदम नगरपालिका में भाजपा के विधायकों और चेयरपर्सन कस्तूरी चौधरी के बीच अहम बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक चुनाव के बाद नगरपालिका की गतिविधियां कुछ धीमी पड़ गई थीं, लेकिन अब प्रशासनिक समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। नागरिक सेवाओं को सुचारु रखने के लिए दोनों पक्ष मिलकर काम कर रहे हैं।
बनगांव में सेवाओं को प्रभावित नहीं होने देने का भरोसा
बनगांव नगरपालिका में भाजपा विधायक देवदास मंडल ने निकाय अधिकारियों के साथ बैठक कर साफ संदेश दिया कि शहर की जरूरी सेवाओं में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन और सरकार के साथ समन्वय बनाकर काम करने का भरोसा भी दिया।
बदलते राजनीतिक माहौल पर बढ़ी चर्चा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में अब स्थानीय राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा का प्रभाव नगरपालिकाओं तक पहुंचता दिख रहा है, जबकि तृणमूल के कई जनप्रतिनिधि भी स्थानीय समीकरणों को देखते हुए टकराव के बजाय तालमेल की रणनीति अपना रहे हैं।