कोलकाता: पश्चिम बंगाल में हिंसा की घटनाओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया गया कि चुनावी हार के बाद भी उसकी राजनीति में कोई बदलाव नहीं आया है। बयान में कहा गया कि "तुष्टिकरण, झूठ और उकसावे की राजनीति" अब भी जारी है।
हिंसा में शामिल लोगों को 'प्रदर्शनकारी' कहने पर सवाल
बयान में विपक्ष के एक बयान का जिक्र करते हुए सवाल उठाया गया कि जिन लोगों को "प्रदर्शनकारी" बताया जा रहा है, क्या वे वास्तव में प्रदर्शनकारी हैं या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोग। आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने एक निर्दोष युवक को उसके घर से बुलाकर केवल नाम और पहचान के आधार पर निशाना बनाया और उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी।
पुलिस पर हमले और उपद्रव के आरोप
सरकार की ओर से कहा गया कि हिंसा में शामिल लोगों ने पुलिस की गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया, पुलिसकर्मियों पर हमला किया, रेलवे ट्रैक को प्रभावित किया और इलाके में अशांति फैलाने की कोशिश की। बयान में सवाल उठाया गया कि ऐसे लोगों को "प्रदर्शनकारी" कहना कितना उचित है।
अपराधियों पर सख्त कार्रवाई का दावा
बयान में कहा गया कि नए पश्चिम बंगाल में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों के साथ-साथ निर्दोष लोगों की हत्या जैसे मामलों में भी किसी को बख्शा नहीं जाएगा। भारतीय न्याय संहिता के तहत दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
'भीड़ की आड़ में अपराध करने के दिन खत्म'
सरकार ने कहा कि भीड़ का सहारा लेकर संगठित अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। बयान में दावा किया गया कि कानून के तहत ऐसे अपराधियों को सजा दिलाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।