कोलकाता, 27 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं और जेंडर-डाइवर्स व्यक्तियों का एक समूह “আমাদের ইশতেহার (Amader Ishtehar)” नाम के तहत सामने आया है। इस समूह ने तीन मुख्य मांगों को लेकर मैनिफेस्टो जारी किया — सुरक्षा, सम्मान और जवाबदेही।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में महिलाओं के खिलाफ 34,000 से अधिक अपराध दर्ज हुए, लेकिन केवल 3.7% मामलों में ही दोषसिद्धि हुई। इस आंकड़े को देखते हुए समूह ने कहा कि उनका मैनिफेस्टो केवल कल्याणकारी मांगों की सूची नहीं है, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही की पुकार है।
मैनिफेस्टो में कहा गया,
"यह कोई कल्याणकारी मांगों की सूची नहीं है। यह संवैधानिक अधिकारों — सुरक्षा, सम्मान और समानता — को लागू करने की मांग है।"
समूह की प्रमुख मांगें:
- राजनीतिक दलों में महिलाओं और जेंडर-डाइवर्स व्यक्तियों के लिए 50% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।
- POSH एक्ट का पालन करना और शोषण के खिलाफ सख्त नीति अपनाना।
- हर सार्वजनिक जगह और संस्था को सुरक्षित बनाना।
- समयबद्ध न्याय, लिंग-संवेदी पुलिसिंग, समावेशी सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बजट में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
समूह के प्रवक्ता ने कहा,
"सुरक्षा सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं हो सकती। यह एक सांस्कृतिक और संस्थागत सवाल है। हर संस्था को जिम्मेदारी उठानी होगी और यह केवल चुनावी चक्र तक सीमित नहीं रह सकती।"
NGO मैत्री द्वारा छह जिलों में किए गए 2024-25 के सुरक्षा ऑडिट में 244 महिलाओं ने बताया कि वे सार्वजनिक जगहों में असुरक्षित महसूस करती हैं, यौन हिंसा का डर है और इसके कारण उनकी शिक्षा और रोज़गार प्रभावित हो रहे हैं।
गैर-बाइनरी ट्रांसजेंडर प्रवक्ता कोयल ने कहा,
"हम सीमित भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहना चाहते। हमें असली नौकरी, असली प्रतिनिधित्व चाहिए और यह जानने का अधिकार चाहिए कि हमारे लिए बजट में कितनी राशि आवंटित की गई और उसका उपयोग कहां हो रहा है।"
समूह ने स्पष्ट किया,
"सुरक्षा, सम्मान और जवाबदेही कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि मूलभूत अधिकार हैं। राजनीतिक वैधता उन समूहों की अनदेखी के साथ नहीं चल सकती।"
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को होगी।