जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में स्थित प्राचीन रघुनाथ मंदिर 36 वर्षों बाद एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। यह ऐतिहासिक क्षण राम नवमी के पावन अवसर पर आया, जिसने स्थानीय हिंदू समुदाय में उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव का माहौल पैदा कर दिया।
मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया
हब्बा कदल इलाके में झेलम नदी के किनारे स्थित इस मंदिर के पुनः उद्घाटन को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया। जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे वातावरण में भक्ति का रंग छा गया।
लोगों की आंखों में झलक रही थी
इस अवसर पर मंदिर समिति द्वारा एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। घंटे-घड़ियाल की ध्वनि, वैदिक मंत्रों के उच्चारण और भजन-कीर्तन की गूंज से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। लंबे समय बाद मंदिर में फिर से पूजा-अर्चना शुरू होने से लोगों की आंखों में खुशी और भावुकता साफ झलक रही थी।
आस्था और सांस्कृतिक विरासत का पुनर्जीवन
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक मंदिर का खुलना नहीं, बल्कि उनकी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का पुनर्जीवन है। 36 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह क्षण उनके लिए बेहद खास और ऐतिहासिक बन गया है। इस पुनः उद्घाटन ने न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी एक सकारात्मक संदेश दिया है, जो क्षेत्र में सद्भाव और परंपराओं के पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।