मयागुड़ी: पश्चिम बंगाल के मयागुड़ी ब्लॉक के वोटपट्टी फांड़ी थाना क्षेत्र के ब्रह्मपुर में वैध बालू बेड को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर बालू कारोबारियों और वाहन मालिकों की सक्रियता बढ़ गई है। लंबे समय से बालू बेड बंद रहने के कारण इससे जुड़े व्यापारियों, ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिकों और मजदूरों के सामने रोजगार और आर्थिक संकट की स्थिति बनी हुई है। इसी समस्या को लेकर बालू कारोबारी, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन मालिक मयागुड़ी थाने पहुंचे और प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं। उनका कहना है कि बालू बेड बंद होने से रोजाना होने वाला कारोबार पूरी तरह प्रभावित हुआ है और कई परिवारों की आमदनी पर इसका सीधा असर पड़ा है। कारोबारियों के मुताबिक, वाहन खड़े रहने से उनके रखरखाव का खर्च भी बढ़ रहा है, जबकि आमदनी का कोई जरिया नहीं बचा है। वहीं, बालू ढुलाई से जुड़े मजदूरों को भी नियमित काम नहीं मिल पा रहा है। कारोबारियों ने प्रशासन से मामले में जल्द हस्तक्षेप करते हुए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने और वैध बालू बेड को दोबारा शुरू कराने की मांग की है।
नदी में हादसे के बाद बंद हुआ बालू बेड
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले चेंगराबांधा से तीन दोस्त ब्रह्मपुर इलाके में नदी में नहाने पहुंचे थे। इसी दौरान एक किशोर गहरे पानी में चला गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद सुरक्षा कारणों को देखते हुए ब्रह्मपुर का वैध बालू बेड बंद कर दिया गया। कारोबारियों का कहना है कि घटना के बाद से अब तक बेड पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इससे बालू कारोबार से जुड़े लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
लंबे समय से काम बंद, कारोबारियों में नाराजगी
बालू कारोबारियों के अनुसार, बेड बंद होने से केवल मालिक ही नहीं बल्कि कई अन्य लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। बालू की ढुलाई में लगे ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों का संचालन रुक गया है। वाहन मालिकों का कहना है कि गाड़ियां खड़ी रहने से कमाई पूरी तरह बंद हो गई है। वहीं, रोजाना काम करने वाले मजदूरों के सामने भी आर्थिक परेशानी बढ़ रही है। कारोबारियों का दावा है कि उन्होंने कई बार बेड मालिक से इसे दोबारा शुरू करने का अनुरोध किया। हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
सुरक्षा व्यवस्था के साथ बेड चालू करने की मांग
कारोबारियों और वाहन मालिकों की मुख्य मांग है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने के बाद वैध बालू बेड को फिर से शुरू किया जाए। उनका कहना है कि नदी में हुए हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर उचित व्यवस्था जरूरी है। इसके लिए प्रशासन और बेड संचालक के बीच समन्वय होना चाहिए। कारोबारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ काम शुरू होने से किसी की जान को खतरा नहीं होगा। साथ ही लंबे समय से प्रभावित लोगों को दोबारा रोजगार मिल सकेगा। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में जल्द निर्णय लेने की अपील की है।
थाना और भूमि एवं भूमि सुधार दफ्तर में सौंपा आवेदन
बेड को जल्द शुरू कराने की मांग को लेकर कारोबारियों और वाहन मालिकों ने मयागुड़ी थाने में लिखित आवेदन दिया। इसके साथ ही भूमि एवं भूमि सुधार दफ्तर में भी अपनी मांग रखी गई है। आवेदन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की गई है। कारोबारियों ने कहा कि वे वैध तरीके से संचालित होने वाले बालू बेड को ही शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए काम शुरू किया जाना चाहिए। अब सभी की नजर प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है।
पूजा से पहले रोजगार शुरू होने की उम्मीद
ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिक प्रशांत सरकार ने कहा कि बालू बेड बंद होने से व्यापारी, वाहन मालिक और मजदूर आर्थिक परेशानी से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामने पूजा का समय है, लेकिन काम बंद होने के कारण लोगों की कमाई रुक गई है। उनके मुताबिक, बेड मालिक से कई बार इसे शुरू करने का अनुरोध किया जा चुका है। उन्होंने आशंका जताई कि सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण ही बेड शुरू नहीं किया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन से सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित कर जल्द काम शुरू कराने की मांग की गई है। कारोबार से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि पूजा से पहले उन्हें राहत मिल सकती है।
प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
ब्रह्मपुर के वैध बालू बेड को लेकर अब प्रशासन की भूमिका अहम मानी जा रही है। एक ओर नदी में हुए हादसे के बाद सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, तो दूसरी ओर इससे जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है। कारोबारियों का कहना है कि सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए बेड को दोबारा शुरू किया जा सकता है। उन्होंने संबंधित विभागों से जल्द निरीक्षण और आवश्यक व्यवस्था कराने की मांग की है। फिलहाल, लिखित आवेदन दिए जाने के बाद कारोबारियों और वाहन मालिकों को प्रशासन के निर्णय का इंतजार है।