कोलकाता: प्रख्यात साहित्यकार बुद्धदेव गुहा की जयंती के अवसर पर रविवार को कोलकाता के महाजाति सदन में एक भव्य स्मरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और बौद्धिक जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए और बंगला साहित्य के इस कालजयी लेखक को श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने बुद्धदेव गुहा के साहित्यिक योगदान, प्रकृति प्रेम और उनकी दूरदर्शी सोच को याद करते हुए उन्हें बंगला साहित्य की अमूल्य धरोहर बताया।
बुद्धदेव गुहा के साहित्यिक योगदान को किया गया याद
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि बुद्धदेव गुहा ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पाठकों को प्रकृति, जंगलों और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने का अनूठा कार्य किया। उनकी चर्चित कृतियां 'चापराश' और 'माधुकरी' आज भी साहित्य प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनके लेखन ने बंगाली साहित्य में प्रकृति और रोमांटिकता को नई पहचान दी।
गणमान्य हस्तियों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद एवं चिंतक शमिक भट्टाचार्य और प्रख्यात वैज्ञानिक एवं चिंतक जिष्णु बसु ने बुद्धदेव गुहा को श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों वक्ताओं ने उनके साहित्य को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएं समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होती जा रही हैं।
विनायक बंद्योपाध्याय ने किया कार्यक्रम का संचालन
स्मरण समारोह का संचालन प्रख्यात कवि एवं साहित्यकार विनायक बंद्योपाध्याय ने किया। इस दौरान उन्होंने बुद्धदेव गुहा के साहित्यिक जीवन और उनकी रचनात्मक यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में देवज्योति चक्रवर्ती, देवजीत सरकार सहित कई साहित्यकार, पाठक और बुद्धिजीवी मौजूद रहे।
साहित्य प्रेमियों की रही उल्लेखनीय उपस्थिति
महाजाति सदन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। बुद्धदेव गुहा की रचनाओं के अंशों का पाठ किया गया और उनके साहित्यिक योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनका लेखन आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति, संवेदना और मानवीय मूल्यों से जोड़ता रहेगा। समारोह का समापन उन्हें सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुआ।