कोलकाता: दुर्गापूजा के उत्सव के बीच कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति के पूजा पंडाल में इस बार महाअष्टमी के दिन उत्सव की रौनक नदारद है। मर्मांतक हादसे के बाद पंडाल परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है। जहां आमतौर पर मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई देती थी, वहां अब पुलिस की पहरेदारी और खामोशी नजर आ रही है। हादसे का खौफ स्थानीय निवासियों के मन में अब भी बना हुआ है।
दूसरे पंडालों में अंजलि देने को मजबूर श्रद्धालु
महाअष्टमी के पावन अवसर पर स्थानीय लोगों को मां दुर्गा की अंजलि देने के लिए दूसरे पूजा पंडालों का रुख करना पड़ रहा है। हादसे के कारण चोरबागान के पूजा पंडाल में सामान्य धार्मिक गतिविधियां और उत्सव का माहौल दिखाई नहीं दे रहा है। आसपास के निवासियों के लिए यह स्थिति बेहद भावुक करने वाली है, क्योंकि त्योहार के इस खास दिन पर इलाके में सामान्य दिनों जैसी चहल-पहल नहीं है।
स्थानीय लोगों ने सुरक्षा और जागरूकता पर उठाए सवाल
इलाके के निवासियों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि पूजा आयोजकों के साथ-साथ आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए और सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, थोड़ी-सी सावधानी और जिम्मेदारी बड़े हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है।
हादसे के बाद पुलिस-प्रशासन की सक्रियता पर चर्चा
स्थानीय निवासियों के बीच पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि हादसे के बाद जिस तत्परता से सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दे रही है, यदि ऐसी सतर्कता पहले बरती गई होती, तो शायद इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था। हालांकि, हादसे के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों के बयान का इंतजार करना जरूरी है।
शहर में उत्सव, चोरबागान में खामोशी
एक ओर कोलकाता के विभिन्न इलाकों में दुर्गापूजा की धूम है। पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और महाअष्टमी के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान जारी हैं। वहीं, चोरबागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति का पंडाल इस उत्सवी माहौल से बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। यहां पुलिस की निगरानी, खाली परिसर और पसरा सन्नाटा हादसे की गंभीरता की याद दिला रहे हैं।
महाअष्टमी के दिन चोरबागान की यह तस्वीर केवल एक पूजा पंडाल की खामोशी नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और सामूहिक जिम्मेदारी को लेकर उठ रहे सवालों को भी सामने लाती है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा।