कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कोलकाता में पत्रकारों पर हुए हमले और सेवाश्रय मेडिकल कैंप से जुड़े मामले पर विस्तृत बयान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दोनों मामलों को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पत्रकारों पर हमले की घटना पर सरकार का रुख
मुख्यमंत्री ने कहा कि "यूनाइटेड कॉकरोच मार्च" के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पहले पुलिस को उकसाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने संयम बनाए रखा। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने डोरिना क्रॉसिंग के पास पत्रकारों को निशाना बनाया और उन पर जूते, बोतलें तथा अन्य वस्तुएं फेंकी गईं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने की स्वतंत्रता है, बशर्ते कानून-व्यवस्था भंग न हो। पुलिस को यह भी निर्देश था कि जब तक प्रदर्शनकारी नियंत्रण से बाहर न हो जाएँ, तब तक किसी प्रकार का बल प्रयोग नहीं किया जाएगा।
छह पत्रकार घायल, छह एफआईआर दर्ज
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस घटना में छह पत्रकार गंभीर रूप से घायल हुए, जिनका SSKM अस्पताल सहित सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया गया। उनके नाम हैं - दीपंकर दासगुप्ता, माखन पात्र, सुमन महापात्र, ऋक पुरोकायस्थ, शिलादित्य कर और कृष्णेंदु मजूमदार। सरकार को पत्रकारों की ओर से लिखित शिकायतें मिल चुकी हैं और अब तक छह अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों में विधानसभा से पारित गुंडा दमन कानून की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं और पुलिस तेजी से जांच कर रही है।
पुलिस की भूमिका की सराहना
सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि यदि पुलिस संयम नहीं रखती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
क्षात्र आंदोलन में बाहरी लोगों की मौजूदगी
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी ने कुछ वामपंथी छात्र संगठनों की भागीदारी की बात कही थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके अनुसार इन संगठनों का राज्य के किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में वास्तविक छात्र संगठन के रूप में कोई अस्तित्व नहीं है। उन्होंने SFI, DYSA, AIDSO, AISA, AISF, AISB, PSU और RS समेत कई संगठनों का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये समूह रैली में शामिल हुए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, शुरुआत में रैली शांतिपूर्ण रही और पुलिस के अनुमान के अनुसार इसमें करीब 9,000 लोग शामिल थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को कोलकाता और आसपास के कई इलाकों, जैसे खिदिरपुर, मेटियाब्रुज, राजाबाजार, पार्क सर्कस, बेलगाछिया, राजारहाट, न्यू टाउन और बागुईआटी सहित अन्य क्षेत्रों से लाया गया।
सेवाश्रय मेडिकल कैंप मामले में जांच तेज
मुख्यमंत्री ने सेवाश्रय मेडिकल कैंप मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों ने कई अहम सबूत जुटाए हैं। उन्होंने बताया कि कथित तौर पर इस्तेमाल की गई एक्स-रे मशीनें, अल्ट्रासाउंड मशीनें और एक्सपायरी दवाइयां जब्त की गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित विभागों, स्वास्थ्य अधिकारियों और अन्य एजेंसियों को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
CID, STF और मेडिकल विशेषज्ञ कर रहे जांच
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले की जांच सीआईडी, एसटीएफ, दक्षिण 24 परगना पुलिस और मेडिकल विशेषज्ञों की संयुक्त टीम कर रही है। मेडिकल कैंप से जुड़े सभी शिकायतकर्ताओं की शिकायतों को एफआईआर के रूप में दर्ज किया गया है और प्रत्येक आरोप की गहन जांच की जा रही है।
'दोषियों को किसी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा'
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि जनता के जीवन से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।