कोलकाता: जादवपुर विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मुद्दा सामने आया है। जादवपुर की बीजेपी विधायक शर्वरी मुखोपाध्याय ने विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘ऋषि अरविंद विश्वविद्यालय’ रखने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि कई राष्ट्रवादी विचार रखने वाले लोग चाहते हैं कि जादवपुर विश्वविद्यालय का नाम ऋषि अरविंद के नाम पर रखा जाए।
गुरुवार को जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर स्थित त्रिगुणा सेन मंच में ‘राष्ट्रवाद और आधुनिक भारत’ विषय पर एक विशेष चर्चा सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में कई प्रस्तावित अतिथि मौजूद नहीं रहे, लेकिन बीजेपी नेता राहुल सिन्हा और जादवपुर की विधायक शर्वरी मुखोपाध्याय मौजूद रहीं। चर्चा के दौरान बार-बार जादवपुर विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति और परिसर में राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे उठाए गए।
राहुल सिन्हा ने लगाया भारत विरोधी ताकतोंaका आरोप
सभा को संबोधित करते हुए राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया कि कभी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाला जादवपुर विश्वविद्यालय अब कथित तौर पर भारत विरोधी ताकतों के प्रभाव में आ गया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ शिक्षक और कर्मचारी भी ऐसी गतिविधियों में शामिल हैं और उन्हें चिह्नित किया जा रहा है।
राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया कि बाहर से आए कुछ माओवादी तत्व जादवपुर विश्वविद्यालय में डेरा जमाकर छात्रों को कथित तौर पर भारत विरोधी बातें कहने के लिए प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राहुल सिन्हा ने इस दौरान ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय को माओवादी, नक्सलवादी और भारत विरोधी ताकतों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा सभा, मार्च, ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय ध्वज फहराने जैसी गतिविधियां हुई हैं।
‘ऋषि अरविंद के नाम पर हो विश्वविद्यालय’
जादवपुर की बीजेपी विधायक शर्वरी मुखोपाध्याय ने विश्वविद्यालय परिसर में नंदलाल बोस की कला और ऋषि अरविंद के विचारों को स्थान देने की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग नंदलाल बोस द्वारा बनाए गए प्रतीक से जुड़े मुद्दे को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वे संविधान के पन्नों पर मौजूद नंदलाल बोस की चित्रकारी को जादवपुर विश्वविद्यालय की दीवारों पर प्रदर्शित करने का समर्थन क्यों नहीं करते।
शर्वरी मुखोपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में ऋषि अरविंद की वाणी और विचारों को भी स्थान मिलना चाहिए।
पत्रकारों से बातचीत में बीजेपी विधायक ने कहा कि ऋषि अरविंद का जादवपुर विश्वविद्यालय और राष्ट्रवादी आंदोलन से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि कई राष्ट्रवादी लोग मानते हैं कि विश्वविद्यालय का नाम ऋषि अरविंद के नाम पर होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मांग के समर्थन में जनहस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और हस्ताक्षरयुक्त मांगपत्र राज्यपाल या केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा।
शिक्षा संगठन ने किया नाम बदलने के प्रस्ताव का समर्थन
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जादवपुर इकाई के सचिव भास्कर सरदार ने जादवपुर विश्वविद्यालय का नाम ऋषि अरविंद के नाम पर रखने के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ऋषि अरविंद का जादवपुर विश्वविद्यालय, भारत और राष्ट्रवादी विचारों से गहरा संबंध रहा है। उनके नाम पर विश्वविद्यालय का नामकरण होना गर्व की बात होगी।
ABUTA ने जताया कड़ा विरोध
वहीं, शिक्षा संगठन एबुटा (ABUTA) के महासचिव गौतम मैती ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेता जिस तरह विश्वविद्यालय परिसर में आकर कथित तौर पर उकसावे वाली टिप्पणियां कर रहे हैं, उससे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है।
गौतम मैती ने कहा कि राजनीतिक उद्देश्य से जादवपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलने की मांग की जा रही है और संगठन इसका कड़ा विरोध करता है। उन्होंने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की।