कोलकाता: कृष्णनगर से तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने नादिया जिले के सर्किट हाउस में देर रात कमरा खाली कराने के कथित प्रयास को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर जिले के तीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। महुआ मोइत्रा ने लोकसभा की प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियमों के नियम 222 के तहत यह नोटिस दिया है। इसमें नादिया के जिलाधिकारी श्रीकांत पल्ली, अतिरिक्त जिलाधिकारी नृपेंद्र सिंह और नजरथ डिप्टी कलेक्टर अनामिका बेरा पर संसदीय प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन और अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया गया है।
देर रात कमरा खाली कराने को लेकर विवाद
महुआ मोइत्रा के अनुसार, संसद के मानसून सत्र के बाद वह 14 अगस्त की शाम करीब 6:15 बजे नादिया सर्किट हाउस पहुंचीं। उन्हें नियमित कमरा आवंटित किया गया और शाम को चाय तथा रात करीब 9:20 बजे भोजन भी उपलब्ध कराया गया। सांसद का आरोप है कि रात 9:47 बजे ADM ने उन्हें फोन कर तत्काल सर्किट हाउस खाली करने को कहा। कारण पूछने पर कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि यह निर्देश जिलाधिकारी की ओर से आया है। इसके बाद रात करीब 10:52 बजे उन्हें व्हाट्सऐप के जरिए 12 अगस्त की तारीख वाला एक आदेश भेजा गया। इसमें सर्किट हाउस में सफाई और रखरखाव के काम के चलते 14 अगस्त की शाम से इसे बंद रखने की बात कही गई थी। महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि यदि आदेश पहले ही जारी हो चुका था, तो उन्हें सर्किट हाउस पहुंचने के समय इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई और रात में देर से कमरा खाली करने को क्यों कहा गया।
सांसद ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर उठाए सवाल
अपने नोटिस में महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि देर रात एक महिला सांसद को सर्किट हाउस से बाहर जाने का दबाव बनाना सुरक्षा और संसदीय प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने गृह मंत्रालय के Order of Precedence का हवाला देते हुए कहा कि सांसदों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए। उनका यह भी दावा है कि उस रात सर्किट हाउस में अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी ठहरे हुए थे, लेकिन उन्हें ही कमरा खाली करने के लिए कहा गया।सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि रात करीब 11 बजे सर्किट हाउस के बाहर भीड़ जमा हुई और नारेबाजी की गई। उन्होंने इसे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक बताया।
लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग
महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सांसदों को अपने संसदीय दायित्वों का निर्वहन करते समय डर, दबाव या उत्पीड़न का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने अंतरिम तौर पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को निर्देश देने की मांग की है, ताकि राज्य में सांसदों के लिए निर्धारित आधिकारिक प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित हो और उन्हें सरकारी सर्किट हाउस जैसी सुविधाओं के इस्तेमाल से कथित तौर पर वंचित न किया जाए। फिलहाल इस पूरे विवाद में लगाए गए आरोप सांसद महुआ मोइत्रा के पक्ष से सामने आए हैं। संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।