कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर चुनावी मैदान में दिखाई दे रही है। चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनाव में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया है। आयोग के इस अंतरिम फैसले के बाद दोनों गुटों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ना होगा।
दोनों गुटों को मिला अलग नाम और चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को दोनों गुटों के लिए अलग-अलग राजनीतिक पहचान तय कर दी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के साथ मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना गया है।
नंदीग्राम में ममता का बड़ा फैसला
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच शुक्रवार को ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया। उनकी ओर से मैदान में उतारी गई उम्मीदवार संचित प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की। इस फैसले के बाद नंदीग्राम का चुनावी समीकरण एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
ममता के फैसले पर ऋतब्रत का तीखा हमला
ममता बनर्जी के कांग्रेस समर्थन के ऐलान के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनके फैसले पर सवाल उठाए। ऋतब्रत ने आरोप लगाया कि नंदीग्राम में उम्मीदवार हटाकर कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला बीजेपी को फायदा पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने ममता बनर्जी को बीजेपी की ‘B Team’ बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी को चुनाव में फायदा पहुंचाने के लिए ही यह कदम उठाया गया है। हालांकि, यह ऋतब्रत बनर्जी का राजनीतिक आरोप है, जिसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। ‘बीजेपी की सबसे बड़ी एजेंट हैं ममता’, ऋतब्रत का दावा।
ऋतब्रत ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले उनकी ओर से नंदीग्राम में उम्मीदवार उतारा गया और अब उम्मीदवार के हटने के बाद कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी का हर कदम बीजेपी को फायदा पहुंचाने की दिशा में दिखाई देता है। ऋतब्रत ने कहा कि ममता बनर्जी खुद भी नहीं जानतीं कि वह क्या कह रही हैं और उनका राजनीतिक रुख लगातार बीजेपी को फायदा पहुंचाने वाला रहा है। इसी दौरान उन्होंने ममता बनर्जी को बीजेपी का ‘सबसे बड़ा एजेंट’ तक बता दिया।
नंदीग्राम को लेकर ममता को खुली चुनौती
नंदीग्राम को लेकर ऋतब्रत ने ममता बनर्जी को खुली चुनौती भी दी। उन्होंने दावा किया कि उनके गुट की ओर से पहले ही ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का न्योता दिया गया था। ऋतब्रत के मुताबिक, ‘‘हमने कहा था कि आप नंदीग्राम से उम्मीदवार बनिए। इससे पहले वहां जीत नहीं पाईं, इस बार हम आपको जीत का स्वाद चखाएंगे और विधानसभा में लेकर आएंगे।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि इस अपील को स्वीकार करने के बजाय ममता बनर्जी ने सबसे पहले अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया। ऋतब्रत ने सवाल उठाया कि अगर बाद में कांग्रेस को ही समर्थन देना था, तो उनके गुट का समर्थन क्यों नहीं किया गया।
‘बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया फैसला’
ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के फैसले की टाइमिंग पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि पहले उम्मीदवार घोषित करना और फिर नामांकन वापस करवाकर कांग्रेस को समर्थन देना किसी सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि बीजेपी को लाभ पहुंचाने की रणनीति है।उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी वास्तव में बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़ना चाहती थीं, तो उनके गुट का समर्थन किया जा सकता था। ऋतब्रत के मुताबिक, नंदीग्राम में उम्मीदवार हटाने का फैसला कई सवाल खड़े करता है।
रेजीनगर में भी शक्ति प्रदर्शन का दावा
नंदीग्राम के साथ रेजीनगर उपचुनाव को लेकर भी ऋतब्रत गुट ने अपनी तैयारी का दावा किया है। ऋतब्रत ने कहा कि रेजीनगर में उनके उम्मीदवार के समर्थन में निकली रैली में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी देखने को मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि उनके उम्मीदवार को क्षेत्र में व्यापक समर्थन मिल रहा है और चुनावी मैदान में उनका गुट मजबूती से मुकाबला कर रहा है। हालांकि, यह दावा ऋतब्रत गुट की ओर से किया गया राजनीतिक दावा है।
‘जोड़ाफूल की पहचान बचाएंगे’
प्रतीक विवाद को लेकर भी ऋतब्रत गुट ने अपना रुख स्पष्ट किया। ऋतब्रत ने कहा कि भले ही चुनाव आयोग के फैसले के कारण इस उपचुनाव में पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा हो, लेकिन उनकी राजनीति में उस पहचान को बनाए रखने की कोशिश जारी रहेगी।उन्होंने कहा कि ‘घास के ऊपर जोड़ाफूल’ की जिस राजनीतिक पहचान से कार्यकर्ता लंबे समय से जुड़े रहे हैं, उसे वह ‘बचाकर रखेंगे’। चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश उपचुनावों के लिए दोनों गुटों की अलग-अलग पहचान तय करता है, जबकि पार्टी के नाम और आरक्षित प्रतीक पर अंतिम विवाद का व्यापक निपटारा अलग प्रक्रिया के तहत होना है।
नंदीग्राम-रेजीनगर में बढ़ी सियासी हलचल
चुनाव आयोग के फैसले, ममता बनर्जी की ओर से नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन और उसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के तीखे हमले ने पश्चिम बंगाल के उपचुनाव की सियासत को और गरमा दिया है।अब नंदीग्राम में ममता समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार और ऋतब्रत गुट के उम्मीदवार के बीच मुकाबले के साथ बीजेपी समेत अन्य दलों की मौजूदगी भी चुनाव को बहुकोणीय बना रही है। नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को मतदान होना है।