कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कैमैक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस कार्यालय में कथित तोड़फोड़ और जाधवपुर विश्वविद्यालय की दीवारों पर लगातार सामने आ रही राजनीतिक ग्राफिटी को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सिलीगुड़ी से भाजपा विधायक शंकर घोष ने इन दोनों मुद्दों को लेकर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और वामपंथी छात्र संगठनों पर निशाना साधा। कैमैक स्ट्रीट कार्यालय में हुई कथित तोड़फोड़ को लेकर अभिषेक बनर्जी द्वारा भाजपा पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकर घोष ने कहा कि किसी भी घटना में कानून को अपना काम करना चाहिए। वहीं, जाधवपुर विश्वविद्यालय में सफेदी के बाद दोबारा राजनीतिक संदेश लिखे जाने को लेकर उन्होंने वामपंथी विचारधारा पर तीखी टिप्पणी की।
कैमैक स्ट्रीट विवाद पर अभिषेक बनर्जी को घेरा
कैमैक स्ट्रीट स्थित TMC कार्यालय में कथित तोड़फोड़ को लेकर अभिषेक बनर्जी के आरोपों पर सवाल पूछे जाने पर डॉ. शंकर घोष ने कहा कि वह इसे लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने तृणमूल नेता की राजनीति पर सवाल जरूर उठाए। उन्होंने कहा कि 2012 से 2026 तक पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासन और सत्ताधारी दल के प्रतिनिधि के तौर पर अभिषेक बनर्जी ने जिस तरह की राजनीति की है, उसके आधार पर वह उन्हें राजनीति के क्षेत्र में “अत्यंत खराब उदाहरण” मानते हैं। शंकर घोष का यह बयान ऐसे समय आया है जब कैमैक स्ट्रीट कार्यालय को लेकर TMC और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
“कोई भी कानून से ऊपर नहीं”
भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि राजनीतिक आरोपों से अलग किसी भी आपराधिक घटना की जांच कानून के मुताबिक होनी चाहिए। अगर कोई अपराध हुआ है तो जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। ऐसे में कैमैक स्ट्रीट की घटना में भी जांच के आधार पर ही यह तय होना चाहिए कि कथित तोड़फोड़ के लिए कौन जिम्मेदार है।
जाधवपुर ग्राफिटी पर भी शंकर घोष का हमला
जाधवपुर विश्वविद्यालय में सफेदी किए जाने के बावजूद दोबारा राजनीतिक नारे और वैचारिक संदेश लिखे जाने को लेकर भी शंकर घोष ने वामपंथी छात्र संगठनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल विश्वविद्यालय की दीवारों पर रंग पोतने या नारे लिखने से जनता का समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, राजनीति में लोगों के बीच जाकर संवाद और काम के जरिए विश्वास बनाया जाता है। शंकर घोष ने कहा कि भारत की जनता राष्ट्रवादी चेतना और राष्ट्रीय भावना से प्रेरित है। उन्होंने ऐसी विचारधाराओं पर सवाल उठाया जिन्हें वह देश की अखंडता और संप्रभुता के लिए चुनौती मानते हैं।
“विदेशी विचारधाराओं के लिए जगह नहीं”
जाधवपुर विश्वविद्यालय की दीवारों पर सामने आए कार्ल मार्क्स के उद्धरण और अन्य राजनीतिक संदेशों के संदर्भ में शंकर घोष ने वामपंथी विचारधारा पर हमला किया। उन्होंने दावा किया कि ऐसी विचारधाराएं, जो उनके अनुसार बार-बार देश की अखंडता और संप्रभुता पर सवाल उठाती हैं, उन्हें भारत में जनता का समर्थन नहीं मिलेगा।हालांकि, किसी विचारधारा या राजनीतिक विचार को लेकर अलग-अलग संगठनों और राजनीतिक दलों की अलग-अलग राय हो सकती है। जाधवपुर विश्वविद्यालय में दीवारों पर लेखन को लेकर मुख्य विवाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कैंपस की राजनीतिक संस्कृति और विश्वविद्यालय प्रशासन के नियमों के बीच संतुलन का भी है।
सफेदी के बाद फिर उभरी राजनीतिक ग्राफिटी
जाधवपुर विश्वविद्यालय में विवादित लेखन को हटाने के लिए दीवारों पर सफेदी किए जाने के बाद फिर से राजनीतिक ग्राफिटी सामने आई। इनमें कार्ल मार्क्स के उद्धरण और “Free Palestine” जैसे संदेश भी शामिल बताए गए हैं। इस मुद्दे पर भाजपा और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है। भाजपा जहां इसे राजनीतिक प्रचार और विवादित लेखन का मुद्दा बता रही है, वहीं वामपंथी छात्र समूह दीवारों को लंबे समय से कैंपस की राजनीतिक अभिव्यक्ति का माध्यम बताते रहे हैं।
कैमैक स्ट्रीट और जाधवपुर से बढ़ा सियासी तापमान
एक ओर कैमैक स्ट्रीट कार्यालय में कथित तोड़फोड़ ने TMC और BJP के बीच टकराव को बढ़ाया है, तो दूसरी ओर जाधवपुर विश्वविद्यालय की ग्राफिटी ने राज्य की पुरानी वैचारिक और छात्र राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। शंकर घोष के बयान से साफ है कि भाजपा इन दोनों मुद्दों को लेकर तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी राजनीति पर एक साथ निशाना साध रही है। वहीं, कैमैक स्ट्रीट की कथित तोड़फोड़ के मामले में वास्तविक जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।