कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विजयादशमी के अवसर पर मां दुर्गा की विदाई के साथ सिंदूर खेला की परंपरा निभाई गई। इसी कड़ी में कोलकाता के सोनागाछी में भी उत्सव का खास रंग देखने को मिला। यहां यौनकर्मियों ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां दुर्गा को विदाई दी। लाल सिंदूर, मुस्कुराते चेहरे और उत्साह से भरे माहौल ने यह संदेश दिया कि जीवन की तमाम मुश्किलों के बीच भी खुशियों और उम्मीदों के लिए जगह बनी रहती है।
2013 से सोनागाछी में हो रही है दुर्गापूजा
सोनागाछी में वर्ष 2013 से दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है। समय के साथ यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सम्मान, आत्मपहचान और सामाजिक स्वीकार्यता से भी जुड़ गया है। पूजा के इन दिनों में यहां की यौनकर्मियां भी उत्सव में शामिल होकर अपनी खुशियां साझा करती हैं।
सिंदूर खेला में दिखा उत्साह और अपनापन
विजयादशमी पर सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां दुर्गा को विदाई दी। इस मौके पर उत्सव का माहौल, आपसी मेलजोल और खुशियां देखने को मिलीं। यह आयोजन उन लोगों के जीवन में भी त्योहार की अहमियत को सामने लाता है, जिन्हें अक्सर सामाजिक भेदभाव और कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
आस्था के साथ सम्मान और नई उम्मीदों का संदेश
सोनागाछी की दुर्गापूजा और सिंदूर खेला केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं हैं। ये आयोजन सामाजिक सम्मान, बराबरी और सामूहिक भागीदारी के महत्व को भी सामने लाते हैं। मां दुर्गा की विदाई के साथ यहां की महिलाओं ने भी नई उम्मीदों और खुशियों के साथ त्योहार को अलविदा कहा। उत्सव की यह तस्वीर याद दिलाती है कि सम्मान, अपनापन और खुशियों पर हर व्यक्ति का समान अधिकार है।