कोलकाता: कोलकाता के तरातला स्थित गोदाम निर्माण मामले में अब मंजूरी प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि भवन निर्माण के लिए आवश्यक स्ट्रक्चरल प्लान जमा किए बिना ही बिल्डिंग प्लान को स्वीकृति दे दी गई। इस मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और भवन सुरक्षा मानकों पर बहस तेज कर दी है।
क्या है स्ट्रक्चरल प्लान का महत्व?
किसी भी भवन निर्माण में बिल्डिंग प्लान के साथ स्ट्रक्चरल प्लान भी अनिवार्य माना जाता है। स्ट्रक्चरल प्लान में भवन की मजबूती, निर्माण सामग्री और तकनीकी डिजाइन से जुड़ी जानकारी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके बिना किसी भी निर्माण को मंजूरी देना भविष्य में सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकता है।
आरोपों के घेरे में मंजूरी प्रक्रिया
मामले में दावा किया जा रहा है कि संबंधित परियोजना का बिल्डिंग प्लान तो स्वीकृत हुआ, लेकिन स्ट्रक्चरल प्लान बाद में जमा करने के आश्वासन पर अनुमति दे दी गई। आरोप यह भी है कि स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया, जबकि सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई थीं।
मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, निर्माण से पहले आवश्यक सॉयल टेस्ट रिपोर्ट भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। भवन निर्माण विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी बड़े निर्माण की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिट्टी की जांच अहम प्रक्रिया होती है। इस पहलू को लेकर भी अब जांच की मांग तेज हो रही है।
जांच और जवाबदेही पर निगाहें
पूरे मामले में यह सवाल उठ रहा है कि यदि सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे, तो निर्माण की अनुमति किन आधारों पर दी गई। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारी किस पर तय होती है।