नई दिल्ली/कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन मुख्य बैंक खातों को 'फ्रीज' किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची पार्टी को सोमवार को कोई तुरंत अंतरिम राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए ईडी से जवाब मांगा है कि क्या रोजाना के खर्चों के लिए कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासक के जरिए कुछ राशि निकालने की अनुमति दी जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को तय की गई है।
215 कर्मचारियों के वेतन और दैनिक खर्च ठप होने की दलील
अदालत में तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि मुख्य खाते फ्रीज होने के कारण पार्टी के संगठनात्मक खर्च रुक गए हैं। करीब 215 अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन देना संभव नहीं हो पा रहा है। इसलिए, कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की देखरेख में दैनिक खर्चों के संचालन के लिए खातों से पैसे निकालने की अनुमति मांगी गई।
केंद्र और ईडी ने फंड संकट के दावे को नकारा
तृणमूल के दावों को खारिज करते हुए केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने अदालत को बताया कि पार्टी के सभी खाते फ्रीज नहीं किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के पास अन्य खातों में कम से कम 164 करोड़ रुपये जमा हैं, इसलिए फंड संकट का दावा आधारहीन है और दैनिक लेनदेन जारी हैं।
हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
यह विवाद 18 जून को बिधाननगर साइबर थाने में दर्ज एक शिकायत के बाद शुरू हुआ था, जिसके आधार पर ईडी ने ईसीआईआर (ECIR) दर्ज कर तृणमूल के करीब 440 करोड़ रुपये वाले तीन खातों को फ्रीज कर दिया था। कोलकाता हाईकोर्ट ने ईडी के इस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद कालीघाट तृणमूल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वे फिलहाल मूल मामले के गुण-दोष की जांच नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल अंतरिम राहत की अर्जी पर विचार कर रहे हैं।