कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर जारी विवाद अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है। भारत निर्वाचन आयोग ने पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों को 12 सितंबर 2026 को चर्चा के लिए बुलाया है। दोनों पक्ष पार्टी के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिन्ह पर अपना-अपना अधिकार जता रहे हैं।
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के मुताबिक, दोनों गुटों के प्रतिनिधियों के साथ यह अहम बैठक दिल्ली के द्वारका स्थित आईआईआईडीईएम में आयोजित की जाएगी। बैठक दोपहर 12 बजे शुरू होगी और इसमें दोनों पक्षों की ओर से पांच-पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हो सकता है।

नंदीग्राम और रजीनगर उपचुनाव ने बढ़ाई राजनीतिक बेचैनी
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। इन दोनों सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर 2026 तय की गई है।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट इन महत्वपूर्ण सीटों पर पार्टी के एक ही नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह के साथ उम्मीदवार उतारने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग के सामने यह सवाल अहम हो गया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान पार्टी के नाम और चिन्ह का इस्तेमाल किस गुट को करने की अनुमति दी जाएगी।
12 सितंबर की बैठक पर टिकी राजनीतिक नजरें
नामांकन की अंतिम तारीख करीब होने के कारण 12 सितंबर को होने वाली बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव आयोग के समक्ष दोनों गुट अपनी दावेदारी और संबंधित दस्तावेज पेश कर सकते हैं।
नंदीग्राम और रजीनगर के उपचुनाव से पहले होने वाली इस सुनवाई के बाद यह विवाद और स्पष्ट हो सकता है कि चुनावी मैदान में आधिकारिक तौर पर 'तृणमूल कांग्रेस' के नाम और उसके चुनाव चिन्ह का अधिकार किसके पास रहेगा। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति की नजरें निर्वाचन आयोग की इस अहम बैठक पर टिकी हुई हैं।