पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सिंबल फ्रीज होने और पार्टी के कई गुटों में बंटने के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी घटनाक्रम के बीच, नेता शंकर Ghosh ने एक साक्षात्कार में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक वजूद पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का प्रतीकात्मक पतन और आंतरिक कलह इस बात का प्रमाण है कि राज्य में अब इस राजनीतिक दल का भविष्य समाप्त हो चुका है।
'सिंबल फ्रीज होना और पार्टी का पतन'
शंकर Ghosh का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के लिए अब किसी भी नए सिंबल या प्रतीक का कोई औचित्य नहीं बचा है। राजनीतिक व्यवस्था और मानसिकता में जो गिरावट इस दल ने पैदा की है, उसका अंत तय था। पार्टी के भीतर नाम को लेकर हुए बदलाव (जैसे ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस) इस बात को दर्शाते हैं कि अब यह संगठन केवल एक व्यक्ति केंद्रित होकर बिखर चुका है।
फुटबॉल प्लेयर और पत्र लिखने वाले गुटों पर तंज
चर्चा के दौरान जब नए सिंबल (जैसे फुटबॉल प्लेयर) और विरोधी गुटों के आपसी घटनाक्रम का जिक्र आया, तो तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। विपक्ष का यह मानना है कि जो पार्टी कभी 'खेला होगा' का नारा देती थी, आज वह मैदान के बाहर केवल गेंद से खेलने तक सीमित रह गई है। इसके अलावा, नंदिनीग्राम और अन्य क्षेत्रों में उम्मीदवारों के नाम वापस लेने के घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण अब पूरी तरह से कमजोर पड़ चुका है।
ममता बनर्जी और विपक्षी नेताओं के समर्थन पर प्रतिक्रिया
जब यह सवाल उठाया गया कि अंतरिम आदेश के बाद राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल और अरविंद केजरीवाल जैसे राष्ट्रीय नेता ममता बनर्जी के समर्थन में आए हैं, तो इस पर कड़ा रुख अपनाया गया। राजनेताओं का मानना है कि डूबते हुए जहाज को बचाने की यह कोशिशें बेमानी हैं, क्योंकि खुद ये तमाम विपक्षी नेता आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। दो नकारात्मक तत्व मिलकर कभी सकारात्मक परिणाम नहीं दे सकते।
जनता के बीच बदलती राजनीतिक मानसिकता
पश्चिम बंगाल की जनता अब बदलाव और सकारात्मक सोच की ओर बढ़ रही है। अतीत के अनुभव और आम जनता की प्रतिक्रियाओं से यह साफ हो जाता है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ राजनीतिक संस्कृति को सुधारने का लंबा सफर तय करना होगा। आने वाले समय में जनता ऐसी अनपेक्षित और अवांछित राजनीतिक संस्कृतियों को पूरी तरह नकार चुकी है।