कोलकाता: पश्चिम बंगाल बीजेपी ने पार्टी अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए नेत्री सोमा घोष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी की ओर से उन पर राज्य नेतृत्व की अनुमति और निर्देशों की अनदेखी करते हुए संगठनात्मक निर्णय लेने का आरोप लगाया गया है। 9 सितंबर को जारी नोटिस में सोमा घोष से 7 दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है।
राज्य नेतृत्व की अनदेखी का आरोप
पार्टी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य नेतृत्व को नजरअंदाज करके संगठन से जुड़े फैसले लेना पार्टी की व्यवस्था और संविधान के अनुरूप नहीं है। बीजेपी ने इस तरह के कदम को गंभीर अनुशासनहीनता बताते हुए कहा है कि इससे संगठन की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अनुशासन समिति की सिफारिश पर कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल बीजेपी की अनुशासन रक्षा समिति की सिफारिश के आधार पर की गई है। पार्टी के राज्य अध्यक्ष और सांसद शमिक भट्टाचार्य के निर्देश के बाद सोमा घोष को औपचारिक रूप से कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।
7 दिन में बताना होगा जवाब
नोटिस में सोमा घोष से स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि उनके कथित व्यवहार और गतिविधियों को देखते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित क्यों नहीं किया जाना चाहिए। बीजेपी ने उन्हें अपना पक्ष लिखित रूप में रखने के लिए 7 दिनों का समय दिया है।
कार्रवाई के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
बीजेपी की इस कार्रवाई के बाद पार्टी के अंदर अनुशासन और संगठनात्मक फैसलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजरें सोमा घोष के जवाब पर टिकी हैं। उनके स्पष्टीकरण के आधार पर पार्टी आगे क्या कदम उठाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।