पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान राजनीतिक दलों के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है। पार्टियां इस चरण में बढ़त हासिल कर दूसरे चरण से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश में जुटी हैं। शुरुआती परिणाम चुनावी नैरेटिव तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
मतदाता सूची पर बड़ा विवाद
इस बार चुनाव से पहले हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने सियासत को और गर्म कर दिया है। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का मुद्दा प्रमुख बहस बन गया है। भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि यह कार्रवाई फर्जी और अवैध मतदाताओं को हटाने के लिए की गई, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इससे असली मतदाताओं, खासकर अल्पसंख्यकों और प्रवासी मजदूरों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर
पहले चरण में कई दिग्गज नेताओं की साख दांव पर लगी हुई है। नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी, माथाभांगा से निशीथ प्रमाणिक, दिनहाटा से उदयन गुहा, सिलीगुड़ी से गौतम देव और बहरामपुर से अधीर रंजन चौधरी जैसे नेता मैदान में हैं। इन सीटों के नतीजे पूरे राज्य के रुझान का संकेत दे सकते हैं।
आगे की चुनावी तारीखें
राज्य में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को प्रस्तावित है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। पहले चरण के बाद राजनीतिक माहौल किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।