पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए राजनीतिक पारा चढ़ गया है। बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों प्रतिद्वंद्वी धड़ों ने अपने-अपने उम्मीदवारों का नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। ममता बनर्जी खेमे की प्रत्याशी संचिता प्रधान (डे) ने सुबह करीब 11 बजे हल्दिया उप-मंडल अधिकारी (SDO) कार्यालय पहुंचकर पर्चा भरा। वहीं, दोपहर में ऋतब्रत बनर्जी गुट के प्रत्याशी मोहम्मद एहतेशामुल हक ने अपना नामांकन जमा किया।यह नामांकन ऐसे समय में हुआ है जब दोनों ही गुट पार्टी के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिन्ह 'जोड़ा फूल' (घास पर दो फूल) पर अपना-अपना दावा ठोक रहे हैं।
"ममता और अभिषेक के दावे के बाद शुरू हुई दरार": मदन मित्रा
ऋतब्रत बनर्जी गुट के उम्मीदवार एहतेशामुल हक के साथ नामांकन स्थल पर पहुंचे विधायक मदन मित्रा ने अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोला।मदन मित्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "इसमें कोई दो राय नहीं है कि जोड़ा फूल प्रतीक ममता बनर्जी का ही है। लेकिन जिस दिन से ममता और अभिषेक दोनों इसके दावेदार बनने लगे, उसी दिन से पार्टी में टूट की शुरुआत हो गई।"उन्होंने आगे कहा कि बागी गुट ममता बनर्जी को मुख्य संरक्षक/सलाहकार के रूप में रखना चाहता था, लेकिन उन्होंने उनका साथ नहीं दिया। इसके बावजूद मित्रा ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग फैसला उनके पक्ष में ही सुनाएगा।
ममता गुट का रुख: "पार्टी हाईकमान के निर्देश पर भरा नामांकन"
दूसरी ओर, ममता बनर्जी खेमे की प्रत्याशी संचिता प्रधान ने पार्टी के आंतरिक विवाद पर ज्यादा बोलने से परहेज किया। उन्होंने साफ किया कि ममता बनर्जी द्वारा हस्ताक्षरित सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक पत्र के आधार पर ही उन्हें नामांकन की अनुमति मिली है और उसी के तहत उन्होंने पर्चा दाखिल किया है। उन्होंने कहा कि आगे पार्टी नेतृत्व जैसा निर्देश देगा, वे उसी के अनुसार चुनावी अभियान चलाएंगी।
चुनाव आयोग में आज दस्तावेजों की जांच, फ्रीज हो सकता है प्रतीक
चुनाव चिन्ह के मालिकाना हक को लेकर निर्वाचन आयोग में दोनों पक्षों की दलीलें जारी हैं।
- आयोग ने दोनों गुटों को 16 सितंबर तक जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य जमा करने का निर्देश दिया था।
- माना जा रहा है कि 17 सितंबर को आयोग इस मामले में दोबारा सुनवाई कर सकता है या अपना अंतरिम आदेश जारी कर सकता है।
क्या हैं कानूनी संभावनाएं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उपचुनाव से पहले आयोग किसी एक पक्ष के हक में अंतिम फैसला नहीं ले पाता है, तो वह 'जोड़ा फूल' प्रतीक को अस्थायी रूप से फ्रीज (ज़ब्त) कर सकता है। ऐसी स्थिति में, दोनों ही गुटों को इस उपचुनाव के लिए नए अस्थायी नाम और नए चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।अब देखना होगा कि चुनाव आयोग बृहस्पतिवार तक कोई अंतरिम राहत देता है या दोनों गुटों को नए सिंबल के साथ चुनावी मैदान में उतरना पड़ता है।