कोलकाता: पश्चिम बंगाल में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच उष्ठी यूनाइटेड प्राइमरी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन (UUPTWA) ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर 29 जुलाई 2011 से पहले शुरू हुई नियुक्ति प्रक्रिया के तहत नियुक्त कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद लाखों कार्यरत शिक्षकों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

2011 से पहले शुरू हुई नियुक्ति प्रक्रिया का दिया हवाला
संगठन ने अपने ज्ञापन में कहा है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया 29 जुलाई 2011 से पहले शुरू हुई थी, उनकी नियुक्ति उस समय लागू एनसीटीई नियम, राज्य सरकार की वैध भर्ती प्रक्रिया और तत्कालीन कानूनों के अनुरूप की गई थी। इसलिए बाद में लागू हुए टीईटी नियमों को पूर्व प्रभाव से उन पर लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा।
2017 के संशोधन कानून का किया उल्लेख
ज्ञापन में राइट टू एजुकेशन (संशोधन) अधिनियम, 2017 के स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी कानून को पूर्व प्रभाव से लागू करने की स्थिति में किसी व्यक्ति के अधिकार, हित या अर्जित लाभ प्रभावित नहीं होने चाहिए। संगठन का दावा है कि यही कानून बनाने वालों की स्पष्ट मंशा भी थी।
सेवा अधिकारों की रक्षा की उठाई मांग
एसोसिएशन का कहना है कि वर्षों से सफलतापूर्वक सेवा दे रहे शिक्षकों को दोबारा टीईटी परीक्षा देने के लिए बाध्य करना वैध अपेक्षा (लेजिटिमेट एक्सपेक्टेशन), अर्जित अधिकार (वेस्टेड राइट्स) और सेवा कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है। संगठन ने कहा कि ये शिक्षक नए अभ्यर्थी नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री से चार प्रमुख मांगें
ज्ञापन में राज्य सरकार से चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं-
* 29 जुलाई 2011 से पहले शुरू हुई नियुक्ति प्रक्रिया के तहत नियुक्त सभी कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों को टीईटी से स्थायी एकमुश्त छूट प्रदान की जाए।
* राज्य सरकार केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय और एनसीटीई को आवश्यक अनुशंसा भेजकर इस मुद्दे का स्थायी कानूनी और प्रशासनिक समाधान सुनिश्चित करे।
* आवश्यकता होने पर राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में क्यूरेटिव याचिका अथवा अन्य आवश्यक कानूनी कदम उठाए।
* टीईटी से जुड़े किसी भी कारण से कार्यरत शिक्षकों की नौकरी, वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतन, पेंशन और अन्य सेवा अधिकार प्रभावित न हों। इसके लिए तत्काल स्पष्ट सरकारी आदेश जारी किया जाए।
सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की अपील
उष्ठी यूनाइटेड प्राइमरी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार इस मुद्दे के कानूनी, प्रशासनिक, संवैधानिक और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध कार्रवाई करेगी, ताकि लाखों कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा और उनके अर्जित अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।