पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। ‘विचाराधीन’ (considered) वोटर्स के मुद्दे पर चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच लगातार विवाद जारी है।
राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर (CEO) कार्यालय के मुताबिक, करीब 60 लाख 6 हजार 675 मतदाता अभी भी विचाराधीन हैं। इनमें से अब तक 36 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
CEO ऑफिस ने जानकारी दी है कि दूसरी एडिशनल लिस्ट शुक्रवार (27 मार्च) को प्रकाशित की जाएगी। जजों द्वारा दी गई जानकारी दोपहर तक अपलोड कर दी जाएगी, जिसके बाद इसे प्रोसेस करने में करीब 4 से 6 घंटे का समय लगेगा।
अधिकारियों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर अब लगभग हर दिन नई लिस्ट जारी की जा सकती है।
इस बीच, इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि वेबसाइट पर सभी वोटर्स को ‘considered’ दिखाना उचित नहीं है। उन्होंने इस कदम पर सवाल उठाते हुए इसे गलत बताया।चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा कि जिन मतदाताओं के नाम तय हो चुके हैं, उन्हें वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
आंकड़ों के मुताबिक:
SIR की फाइनल और ड्राफ्ट लिस्ट से 63,66,952 नाम पहले ही हटाए जा चुके हैंपहली अतिरिक्त सूची से करीब 12 लाख नाम बाहर किए गए
28 फरवरी को जारी फाइनल लिस्ट में कुल 7,04,59,284 वोटर थेसुनवाई प्रक्रिया में कुल 1.42 करोड़ मतदाताओं को शामिल किया गयाआयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जा रही है।
फिलहाल, ‘विचाराधीन’ वोटर्स का मुद्दा राज्य की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है और आने वाले दिनों में इस पर और भी टकराव देखने को मिल सकता है।