केंद्र सरकार ने देशभर में पेट्रोल बिक्री को नई संरचना में ढालते हुए 1 अप्रैल से सभी पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को अनिवार्य कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह ईंधन भारतीय मानक ब्यूरो की उन गाइडलाइंस पर आधारित होगा जिनमें न्यूनतम 95 के रिसर्च ऑक्टेन नंबर को अनिवार्य किया गया है। आरओएन ईंधन की गुणवत्ता और उसकी स्थिरता को मापने वाला मानक है, जो इंजन के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में बेहद प्रभावी भूमिका निभाता है। सरकार का यह निर्णय स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में उठाया गया अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ईंधन गुणवत्ता और RON मानक क्यों है अहम
नए नियम के तहत बेचे जाने वाले मिश्रित पेट्रोल को न सिर्फ उच्च गुणवत्ता के मानक पूरे करने होंगे, बल्कि आरओएन का स्तर भी कम-से-कम 95 होना चाहिए। यह मानक बताता है कि ईंधन प्रज्वलन से पहले दबाव को कितना सहन कर सकता है और इंजन के प्रदर्शन को किस हद तक सुचारू रखता है। भारत में पहले साधारण पेट्रोल का आरओएन कम होता था, पर अब उच्च आरओएन वाला मिश्रित ईंधन वाहनों की परफॉर्मेंस, इंजन की लाइफ और उत्सर्जन नियंत्रण—तीनों में सकारात्मक भूमिका निभाएगा।
वाहन उद्योग पर नए नियमों का प्रभाव
देश में वर्ष 2023 से 2025 के बीच निर्मित अधिकतर वाहनों को E20 ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किया जा चुका है। ऐसे वाहनों में किसी तरह की बड़ी तकनीकी समस्या की संभावना नहीं है, जबकि पुराने मॉडल के वाहनों में मामूली प्रभाव देखा जा सकता है। पुराने वाहनों के माइलेज पर 3% से 7% तक का असर पड़ सकता है और कुछ रबर या प्लास्टिक के पार्ट अपेक्षाकृत तेज़ी से खराब हो सकते हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परिवर्तन दीर्घकालिक रूप से पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी और राष्ट्रीय ऊर्जा लागत के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
भारत का एथेनॉल मिशन और तेज होती गति
भारत सरकार ने वर्ष 2022 में अपने निर्धारित समय से पाँच महीने पहले पेट्रोल में 10% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर दुनिया को चौंकाया था। इसके बाद 20% एथेनॉल मिश्रण की समयसीमा को 2030 से घटाकर वर्ष 2025-26 कर दिया गया। आज भारत के अधिकांश पेट्रोल पंप E20 पेट्रोल उपलब्ध करा रहे हैं और आगामी 1 अप्रैल से यह व्यवस्था पूरे देश में अनिवार्य हो जाएगी। यह कदम किसानों की आमदनी बढ़ाने, गन्ने से बने एथेनॉल की खपत बढ़ाने और कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण नियंत्रण की दिशा में मजबूत पहल
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम करता है बल्कि भारत को विदेशी तेल आयात पर निर्भरता घटाने में भी मदद करता है। गन्ने और अन्य जैव स्रोतों से तैयार एथेनॉल पर्यावरण अनुकूल होता है। सरकार के इस फैसले से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ने के साथ-साथ लाखों किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मार्ग भी खुलेगा। भारत का एथेनॉल मिशन अब एक व्यापक ऊर्जा अभियान का स्वरूप ले चुका है, जो भविष्य में देश की आर्थिक और पर्यावरणीय संरचना को गहराई से प्रभावित करेगा।
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