नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार सुबह भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सुबह 9:41 बजे तक सेंसेक्स 891 अंक टूटकर 73,005 के स्तर पर आ गया। वहीं, निफ्टी50 करीब 270 अंक की गिरावट के साथ 22,867 पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 896 अंक तक फिसल गया। निफ्टी50 ने भी 23,000 के अहम स्तर को तोड़ दिया और 22,856 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। बाजार में चौतरफा बिकवाली का असर देखने को मिला।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बाजार पर दबाव
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी को माना जा रहा है। अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 5.2% तक पहुंच गई। यह स्तर करीब 20 साल के उच्चतम स्तरों में से एक है। अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से निवेशकों के लिए वहां निवेश करना ज्यादा आकर्षक हो जाता है। ऐसे में उभरते बाजारों से विदेशी निवेश के बाहर जाने का दबाव बढ़ सकता है। भारत जैसे बाजारों में इसका असर शेयरों की कीमतों पर देखने को मिलता है। निवेशक जोखिम वाले एसेट्स में अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं। इसी वजह से भारतीय बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बिकवाली तेज नजर आई।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
बाजार में दबाव की दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1% से ज्यादा चढ़कर 105.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी वैश्विक बाजार के साथ-साथ भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत के एक बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। तेल महंगा होने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही कंपनियों की लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। महंगा तेल महंगाई के मोर्चे पर भी चिंता बढ़ा सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए नकारात्मक संकेत के तौर पर लिया।
अमेरिका-ईरान तनाव का भी असर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे मध्य-पूर्व में जारी तनाव भी एक अहम कारण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से दिए गए शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विवाद को सुलझाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह का तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ सकती है। ईरान ने यह प्रस्ताव पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान रखा था। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कहा है कि इस सप्ताह अमेरिकी वार्ताकार आगे भी बातचीत करेंगे। इसलिए बाजार की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता में होने वाली किसी भी प्रगति पर रहेगी।
बैंकिंग और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली
शेयर बाजार की गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रही। एनएसई के सभी बड़े सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। निफ्टी बैंक इंडेक्स में करीब 1.3% की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 1.06% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 1.12% नीचे रहा। इसके अलावा मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में भी दबाव देखने को मिला। पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक और रियल्टी इंडेक्स भी कमजोर रहे। ऑयल एंड गैस इंडेक्स में भी करीब 0.8% से 1.5% तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ रहा कि शुरुआती कारोबार में बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव बना हुआ था।
हिंडाल्को समेत इन बड़े शेयरों में गिरावट
निफ्टी50 के कई प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। हिंडाल्को शुरुआती कारोबार में सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा और करीब 2.5% टूटकर 952 रुपये के आसपास आ गया। मैक्स हेल्थकेयर और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर भी दबाव में रहे। हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस में भी गिरावट दर्ज की गई। बजाज फिनसर्व और अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयर भी 1.5% से 2.2% तक फिसले। एचडीएफसी बैंक और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। बाजार में व्यापक बिकवाली के चलते निवेशकों की धारणा पर दबाव बना रहा।
इन शेयरों ने बाजार को दी थोड़ी राहत
बाजार में जहां ज्यादातर शेयरों में गिरावट देखने को मिली, वहीं कुछ कंपनियों के शेयर बढ़त में कारोबार करते नजर आए। डॉ. रेड्डीज लैब्स के शेयरों में मजबूती रही। कोल इंडिया के शेयर भी बढ़त में रहे। आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टीसीएस के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। एसबीआई लाइफ के शेयरों ने भी बाजार की कमजोरी के बीच सकारात्मक प्रदर्शन किया। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर भी बढ़त में कारोबार करते रहे। हालांकि, इन चुनिंदा शेयरों की तेजी बाजार में जारी व्यापक गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रही। ज्यादातर शेयरों में बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक दबाव में बने रहे।
इंडिया वीआईएक्स में उछाल, निवेशकों में बढ़ी चिंता
बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने का संकेत इंडिया वीआईएक्स में भी देखने को मिला। इंडिया वीआईएक्स करीब 11.5% उछलकर 13.54 के स्तर पर पहुंच गया। यह सूचकांक बाजार में आने वाली संभावित अस्थिरता की उम्मीद को दर्शाता है। इसके अलावा एनएसई पर बड़ी संख्या में शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। करीब 2,360 शेयरों में गिरावट देखने को मिली, जबकि केवल 708 शेयर बढ़त में थे। यानी गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों की तुलना में काफी ज्यादा रही। इससे बाजार में बिकवाली के व्यापक दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों और आने वाली खबरों पर बनी हुई है।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी
भारतीय शेयर बाजार के साथ अन्य एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2% नीचे कारोबार करता नजर आया। चीन का शंघाई कंपोजिट भी करीब 1.1% फिसला। जापान का निक्केई हालांकि अपेक्षाकृत स्थिर रहा और करीब 0.02% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों पर भी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मध्य-पूर्व के तनाव का असर देखने को मिल रहा है। वैश्विक निवेशक इस समय ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में विदेशी बाजारों की कमजोरी का असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
आगे बाजार की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले समय में शेयर बाजार की दिशा कई वैश्विक घटनाक्रमों से प्रभावित हो सकती है। सबसे पहले निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की प्रगति पर रहेगी। अगर तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव घट सकता है। दूसरी ओर, तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती है तो भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए चिंता बढ़ सकती है। अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड की यील्ड में आगे होने वाला उतार-चढ़ाव भी अहम रहेगा। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक शेयर बाजारों के रुख पर भी नजर रहेगी। फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, इसलिए निवेशकों के लिए आने वाले वैश्विक संकेत महत्वपूर्ण होंगे।