लोकसभा चुनाव में कम मतदान प्रतिशत और सियासी टेंशन का दौर जारी है। लिहाजा पहले के लोकसभा चुनावों की तुलना में इस बार बीजेपी डिफरेंट बिग एजेंडा प्लान पर काम कर रही है। दरअसल, लोकसभा चुनावों में गिने-चुने राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव हुए। लेकिन, इस बार के चुनावों में खास बात यह है कि हर चरण में अलग-अलग मुद्दों की गर्म सियासत देखी जा रही है।
सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दिखाई दे रहे है
पहले चरण के चुनावों में राम मंदिर और धर्म के सियासी तड़के का जोर दिखाई दिया। दूसरे चरण में आरक्षण के साथ विरासत टैक्स और कांग्रेस के घोषणा पत्र में अल्पसंख्यक वर्ग से वादों को लेकर जमकर बयानी जंग दिखाई दी। अब तीसरे चरण में चुनावी मुद्दों का जोर खौलता दिखाई दिया। पीएम मोदी से लेकर बीजेपी के नेताओं ने कांग्रेस को पाकिस्तान से जोड़ा। साथ ही अब पाकिस्तान परस्ती, चीन और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दिखाई दे रहे हैं।
कांग्रेसी दिग्गज सिंपैथी पॉलिटिक्स पर
उधर, अब तीसरे चरण में कांग्रेसी दिग्गज सिंपैथी पॉलिटिक्स पर हैं। गांधी परिवार और शहादत के साथ राजनीति मंगलसूत्र तक पहुंची। लिहाजा इलेक्शन वोटिंग फार्मूला के तहत तय रणनीति के साथ अलग-अलग चरणों में अलग-अलग मुद्दों की सियासत देखी जा रही है। न्यू फार्मूला पॉलिटिक्स को लेकर कांग्रेस का मानना है कि पहले चरण में कम मतदान प्रतिशत को लेकर बीजेपी ने मूल मुद्दों से भटकाने के लिए यह फार्मूला तैयार किया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. रवि सक्सेना ने आरोप लगाया कि इतना कम मतदान प्रतिशत से साफ जाहिर है कि बीजेपी के पहले चरण के मुद्दे जनता पर बेअसर साबित हुए और अपनी जमीन खिसती देख पूरा नेतृत्व तय एजेंडा की ओर बढ़ा।
बीजेपी की राजनीति हमेशा से ही राष्ट्रवाद और विकासवाद की रही
वहीं बीजेपी ने कहा कि बीजेपी की राजनीति हमेशा से ही राष्ट्रवाद और विकासवाद की रही है। बीजेपी प्रवक्ता शुभम शुक्ला ने कहा कि आज भी हमारी राजनीति राष्ट्रवाद और विकासवाद के इर्द-गिर्द की घूम रही है। राजनीति में जो नए विषय जैसे कि मंगलसूत्र, विरासत टैक्स, अल्पसंख्यक वोटरों को लेकर एकतरफा सियासत कांग्रेस की देन है। कांग्रेस की सनातन और राष्ट्र विरोधी मानसिकता के कारण उनका वोटर भी लोकसभा के चुनाव में घर पर बैठ गया है।
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