मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में दो बड़े फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर प्रदेश के आम नागरिकों और चार लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा। एक तरफ सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों को जिला अस्पताल देने की योजना पर रोक लगा दी है, वहीं दूसरी ओर नौ वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को राहत देते हुए उनके ओहदे और वेतन में बढ़ोतरी की घोषणा की गई है।
सरकारी अस्पतालों पर सरकार का ही रहेगा नियंत्रण
प्रदेश सरकार ने पहले तय किया था कि सरकारी जिला अस्पतालों को निजी मेडिकल कॉलेजों के अधीन सौंप दिया जाएगा। लेकिन अब इस निर्णय को वापस ले लिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, इन अस्पतालों का संचालन पूर्ववत सरकारी तंत्र के माध्यम से ही किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। हालांकि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत खोले जाने वाले निजी मेडिकल कॉलेजों को अस्पताल की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, लेकिन उनके संचालन में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
निजी कॉलेजों को एक रुपए में 25 एकड़ जमीन
सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों को बढ़ावा देने के लिए एक नई नीति भी बनाई है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि अब सरकार PPP मॉडल के तहत मेडिकल कॉलेज खोलने वालों को 25 एकड़ जमीन मात्र एक रुपए की दर से देगी। पूर्व में कॉलेजों को स्वयं जमीन की व्यवस्था करनी होती थी, लेकिन अब इसमें ढील दी गई है। जिला अस्पतालों के साथ कार्य करने के लिए एक अलग संचालन समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें निजी कॉलेजों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इससे उनकी वैधानिक आवश्यकताएं पूरी होंगी, लेकिन नियंत्रण सरकार के ही पास रहेगा।
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