रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति को साल 2017 में झकझोर देने वाला बहुचर्चित CD कांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। करीब नौ साल पुराने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को मार्च 2025 में CBI की विशेष अदालत से मिली राहत अब खतरे में पड़ती दिख रही है। सेशन कोर्ट के ताज़ा फैसले ने न सिर्फ पुराने ज़ख्म हरे कर दिए हैं, बल्कि राज्य की सियासत में भी नया राजनीतिक भूचाल खड़ा कर दिया है।
सेशन कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें भूपेश बघेल को CD कांड मामले में राहत दी गई थी। CBI ने इस फैसले को चुनौती देते हुए रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही अब भूपेश बघेल पर दोबारा मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है CD कांड का पूरा मामला?
अक्टूबर 2017 में तत्कालीन भाजपा मंत्री राजेश मूणत का एक कथित अश्लील वीडियो सामने आया था, जिसने प्रदेश की राजनीति में भारी हंगामा मचा दिया था। 26 अक्टूबर 2017 को भाजपा नेता प्रकाश बाजाज ने इस मामले में FIR दर्ज कराई। इसके बाद जांच के दौरान दिल्ली में छापेमारी हुई और कथित CD की कॉपी ज़ब्त की गई। मामले की जांच बाद में CBI को सौंप दी गई।
28 अक्टूबर 2017 को वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा की गिरफ्तारी हुई, जबकि 2018 में आरोपी रिंकू खनूजा की आत्महत्या ने केस को और गंभीर बना दिया। 2018 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भूपेश बघेल को भी गिरफ्तार किया गया था। CBI ने इस मामले में कुल छह आरोपियों को नामजद किया था।
2025 में राहत, 2026 में फिर संकट
4 मार्च 2025 को CBI की विशेष अदालत ने भूपेश बघेल को इस मामले में बरी कर दिया था। लेकिन CBI ने इस फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी। अब 2026 की शुरुआत में सेशन कोर्ट ने CBI की याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे भूपेश बघेल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नज़र आ रही हैं।
हाई कोर्ट जाने की तैयारी
सेशन कोर्ट के फैसले के बाद भूपेश बघेल ने साफ कर दिया है कि वे इसके खिलाफ हाई कोर्ट का रुख करेंगे। वहीं भाजपा का कहना है कि इस मामले में ऐसी सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे भविष्य में राजनीति को बदनाम करने वालों के लिए यह एक मिसाल बने।
राजनीति गरम, निगाहें अदालत पर
CD कांड एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्याय व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। जहां कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं भाजपा इसे कानून की जीत करार दे रही है।
अब बड़ा सवाल यही है— क्या भूपेश बघेल को हाई कोर्ट से फिर राहत मिलेगी, या यह मामला उनकी राजनीति के लिए नई चुनौती साबित होगा? इसका जवाब अब आने वाला वक्त और अदालत का अगला फैसला ही देगा।
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