रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में 2028 के विधानसभा चुनाव की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। विधानसभा चुनाव में अभी करीब दो साल का वक्त बाकी है, लेकिन प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की गतिविधियों से साफ है कि चुनावी जमीन तैयार करने की कवायद शुरू हो चुकी है। कांग्रेस जहां अपने संगठन को मजबूत करने के साथ निष्कासित नेताओं की घर वापसी का रास्ता खोल रही है, वहीं पार्टी ने भाजपा के कई विधायकों के संपर्क में होने का दावा कर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
कांग्रेस ने 20 निष्कासित नेताओं की घर वापसी का रास्ता खोला
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक बार फिर नेताओं की घर वापसी का सिलसिला शुरू हुआ है। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने पार्टी से निष्कासित 20 नेताओं का निष्कासन रद्द करने का फैसला लिया है। पार्टी की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, कुल 36 नेताओं ने अपना निष्कासन समाप्त करने के लिए आवेदन दिया था। इनमें से 20 मामलों में फैसला लिया जा चुका है, जबकि 16 प्रकरण अभी लंबित बताए जा रहे हैं।
16 नेताओं के मामलों पर फैसला बाकी
कांग्रेस के जिन 16 नेताओं के मामलों पर अभी फैसला नहीं हुआ है, उनमें अमित जोगी, डॉ. रेणु जोगी और पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह के नाम शामिल होने की बात सामने आ रही है। इन मामलों पर पार्टी की अनुशासन समिति आगे निर्णय ले सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस में और भी नेताओं की घर वापसी की संभावना को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
घर वापसी को संगठन मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा
कांग्रेस की ओर से नेताओं का निष्कासन रद्द करने के फैसले को केवल अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस लगातार अपने संगठन को दोबारा मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। पार्टी का फोकस अब केवल चुनाव के समय उम्मीदवारों के चयन और प्रचार अभियान तक सीमित रहने के बजाय बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर दिखाई दे रहा है।
दो साल पहले से बूथ मैनेजमेंट पर जोर
2028 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस बूथ मैनेजमेंट और जमीनी संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर जोर देती नजर आ रही है। पार्टी के लिए चुनौती 2023 के चुनाव में कमजोर पड़े संगठन और बदले राजनीतिक समीकरणों को दोबारा मजबूत करना है। इसी कड़ी में पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लाने की कवायद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2018 के प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए 2018 का विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण रहा था, जब पार्टी ने बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इसके बाद 2023 में सत्ता गंवाने के बाद अब पार्टी एक बार फिर संगठन को सक्रिय कर राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। 2028 के चुनाव में पार्टी का लक्ष्य अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने के लिए अभी से तैयारियां तेज करना माना जा रहा है।
भाजपा के कई विधायकों के संपर्क में होने का कांग्रेस का दावा
इसी बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया है। बैज ने कहा है कि भाजपा के कई विधायक और आधा दर्जन से ज्यादा पूर्व विधायक कांग्रेस के संपर्क में हैं। उनके इस दावे के बाद प्रदेश की सियासत में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इन नेताओं के नाम या उनके कांग्रेस में शामिल होने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने किया पलटवार
दीपक बैज के दावे पर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने पलटवार किया है। पुरंदर मिश्रा का दावा है कि दीपक बैज खुद भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं और उन्हें भाजपा में शामिल होने का आग्रह कर रहे हैं। दोनों नेताओं के इन दावों के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है।
2028 से पहले छत्तीसगढ़ में बन रही चुनावी जमीन
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन कांग्रेस और भाजपा की मौजूदा राजनीतिक गतिविधियां संकेत दे रही हैं कि 2028 की चुनावी जमीन तैयार करने का काम शुरू हो चुका है। कांग्रेस के लिए एक तरफ निष्कासित नेताओं की घर वापसी और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद है, तो दूसरी तरफ भाजपा के नेताओं के कांग्रेस के संपर्क में होने का दावा राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
दावों का असर आगे की राजनीति में दिखेगा
अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा के नेताओं के कांग्रेस के संपर्क में होने का दावा आने वाले महीनों में किसी ठोस राजनीतिक घटनाक्रम में बदलता है या नहीं। वहीं कांग्रेस की घर वापसी की प्रक्रिया और संगठन विस्तार की रणनीति किस तरह आगे बढ़ती है, यह भी 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। फिलहाल इतना जरूर है कि छत्तीसगढ़ की सियासत में 2028 की तैयारियों का शुरुआती दौर शुरू हो चुका है और आने वाले समय में राजनीतिक तस्वीर में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।