इंदौर में रंगपंचमी के अवसर पर रविवार को 77 साल पुरानी गेर परंपरा फिर से जीवंत हुई। इस परंपरा में लाखों लोग राजवाड़ा पर एकत्रित हुए और अपनेपन की गेर में तन-मन को रंगों से भीगाया।
राजवाड़ा पर उमड़ा जनसैलाब, देशी-विदेशी मेहमान भी शामिल
दिन बढ़ते ही शहर की हृदयस्थली राजवाड़ा पर चार गेर और एक फाग यात्रा निकली। रंगों के इस पर्व में शामिल होने के लिए मार्ग के दोनों ओर मकानों, दुकानों और ऑफिस की छतों पर स्थानीय लोगों के साथ देशी-विदेशी मेहमानों का भी जमावड़ा लगा।
रंग बरसाने की नवीन तकनीकें और झांकियां
इस बार गेर में रंग बरसाने के लिए पुरानी तकनीकों के साथ नई तकनीकों का भी उपयोग किया गया। नगर निगम की झांकी में हाथी की सूंड से रंग बरसा, मारल क्लब की गेर में तोप से सैकड़ों किलो गुलाल उड़ाया गया। संस्था सृजन की गेर में महाकाल की झांकी, लट्ठमार और सद्भावना संदेश लोगों को खासा पसंद आया। इस प्रकार यह उत्सव चार घंटे तक चलता रहा और शहरवासियों के लिए यादगार बन गया।
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