भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप’ ने प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस को नई मजबूती दी है। उन्होंने बताया कि अब नागरिकों को अलग-अलग विभागों की सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ता, बल्कि 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाएँ एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई हैं। इससे सेवाएँ अधिक सरल, पारदर्शी और तेज हो गई हैं तथा आम जनता का समय और संसाधन दोनों बच रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल प्रदेश को डिजिटल इंडिया की दिशा में अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करती है और सुशासन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाती है।
पूरी प्रक्रिया हुई पेपरलेस और फेसलेस, पारदर्शिता में बड़ा सुधार
एमपी ई-सेवा पोर्टल पर आधार आधारित प्रमाणीकरण, ई-साइन और डिजिटल प्रमाणपत्र जैसी सुविधाओं के जरिए पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस और फेसलेस बनाया गया है। नागरिक अब आवेदन से लेकर स्टेटस ट्रैकिंग और स्वीकृति तक की सभी सुविधाएँ एक ही जगह से प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का दावा है कि इससे न केवल कामकाज में तेजी आई है, बल्कि सिस्टम में जवाबदेही और पारदर्शिता भी काफी बढ़ी है।
समग्र पोर्टल से एकीकरण, ऑटो-वेरिफिकेशन से मिली बड़ी सुविधा
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के पोर्टल से भी जोड़ा गया है, जिससे प्रत्येक परिवार और सदस्य को यूनिक आईडी प्रदान की गई है। इसके जरिए पात्रता की ऑटो-वेरिफिकेशन प्रक्रिया संभव हुई है, जिससे दस्तावेज़ों की बार-बार जरूरत खत्म हो गई है। एक बार अपलोड किए गए दस्तावेज भविष्य की सेवाओं के लिए स्वतः उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे प्रक्रिया और आसान हो गई है।
मोबाइल-फर्स्ट डिज़ाइन से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को फायदा
एमपी ई-सेवा ऐप को मोबाइल-फर्स्ट और बहुभाषीय फीचर्स के साथ डिजाइन किया गया है, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकें। दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भी विशेष फीचर्स जोड़े गए हैं। अब तक इस प्लेटफॉर्म पर 2 लाख से अधिक ट्रांजेक्शन दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे इसकी उपयोगिता और लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
डिजिटल गवर्नेंस में मध्यप्रदेश की मजबूत पहचान
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन 2025 में मध्यप्रदेश ने 1752 ई-सेवाओं को मैप कर देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। इसके अलावा ‘सायबर तहसील’ और ‘संपदा 2.0’ जैसी परियोजनाओं के लिए राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में 100 प्रतिशत ई-सेवा डिलीवरी का लक्ष्य पूरा कर मध्यप्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस का मॉडल राज्य बनाया जाएगा।