चित्रकूट। सेवा, समर्पण और करुणा की मिसाल माने जाने वाले पद्मश्री सम्मानित नेत्र चिकित्सक डॉ. बी.के.जैन (बुधेंद्र कुमार जैन) का शुक्रवार शाम 4:24 बजे 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने चित्रकूट स्थित सदगुरू सेवा संघ ट्रस्ट से संचालित जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय में अंतिम सांस ली। वे पिछले कई महीनों से अस्वस्थ थे और मुंबई में उनका उपचार चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उन्हें चित्रकूट लाया गया, जहां वेंटिलेटर से हटाए जाने के बाद उनका निधन हुआ। ट्रस्ट परिवार ने आधिकारिक रूप से उनके निधन की पुष्टि की है।
50 साल सेवा को समर्पित जीवन
डॉ. जैन ने 1970 के दशक में चित्रकूट जैसे पिछड़े और आदिवासी अंचल में नेत्र चिकित्सा सेवाओं की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने सस्ती और सुलभ नेत्र चिकित्सा का मॉडल विकसित किया। उनके नेतृत्व में सदगुरु नेत्र चिकित्सालय आज विश्व के प्रमुख नेत्र चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है। यहां हर वर्ष करीब 1.55 लाख से अधिक नेत्र ऑपरेशन होते हैं और 17 लाख से ज्यादा मरीजों को लाभ मिलता है।
4500 से अधिक नेत्र शिविर, लाखों को रोशनी
डॉ. जैन ने 4500 से अधिक सामुदायिक नेत्र शिविर आयोजित किए। उनकी पहल पर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में 130 प्राथमिक नेत्र जांच केंद्र स्थापित हुए। पन्ना, सतना, बांदा, हमीरपुर और फतेहपुर जैसे जिलों को मोतियाबिंद बैकलॉग से मुक्त कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पद्मश्री से सम्मानित
26 जनवरी 2025 को उन्हें चिकित्सा (नेत्र देखभाल) के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2025 में ही उन्हें ‘डॉक्टर ऑफ लिटरेचर’ की उपाधि भी प्रदान की गई।
शिक्षा और संकल्प की मिसाल
सतना जिले में जन्मे डॉ. जैन ने 1973 में रीवा से एमबीबीएस और 1979 में मुंबई से नेत्र रोग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। बड़े शहरों में करियर के अवसर छोड़कर उन्होंने ग्रामीण भारत की सेवा का मार्ग चुना। स्वामी रणछोड़ दास जी महाराज के मार्गदर्शन में उन्होंने सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाया और लाखों लोगों की आंखों में रोशनी लौटाई। डॉ. बीके जैन का जाना केवल एक चिकित्सक का निधन नहीं, बल्कि सेवा की एक परंपरा का विराम है। चित्रकूट सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में उनके निधन से शोक की लहर है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
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