MP School Teachers E-Attendance: मध्यप्रदेश में लगातार बारिश और कई इलाकों में जलभराव-बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्कूली शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए अहम व्यवस्था की गई है। अब ऐसे क्षेत्रों में जहां भारी बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं या रास्तों पर जलभराव है, वहां शिक्षकों को सिर्फ ई-अटेंडेंस दर्ज कराने के लिए जोखिम उठाकर स्कूल पहुंचना जरूरी नहीं होगा। भोपाल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों वाले स्कूलों में शिक्षक और कर्मचारी निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचेंगे। वहीं, बाढ़ या जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन या वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा सकेंगी।
सुबह 10:30 बजे तक लगा सकेंगे ई-अटेंडेंस
बारिश के दौरान शिक्षकों को कुछ अतिरिक्त समय भी दिया गया है। निर्देशों के अनुसार शिक्षकों और कर्मचारियों को 15 मिनट का ग्रेस पीरियड मिलेगा और वे सुबह 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज कर सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य खराब मौसम और जलभराव के दौरान शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी से बचाना है।
बाढ़ प्रभावित स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा
जिन इलाकों में बाढ़ या जलभराव के कारण स्कूल तक पहुंचना मुश्किल है, वहां शिक्षक निर्धारित टाइम टेबल के अनुसार ऑनलाइन/वर्चुअल कक्षाएं संचालित कर सकते हैं। इससे खराब मौसम के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई को भी जारी रखने की कोशिश की जाएगी। यानी परिस्थितियां सामान्य नहीं होने पर पढ़ाई को पूरी तरह रोकने के बजाय डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
सिर्फ अटेंडेंस के लिए जोखिम नहीं उठाना होगा
जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बाढ़ या जलभराव जैसी स्थिति में किसी शिक्षक या कर्मचारी को केवल ई-अटेंडेंस लगाने के लिए जोखिम लेकर स्कूल आने के लिए बाध्य नहीं किया जाए। शिक्षकों और कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
सामान्य इलाकों में समय पर पहुंचना होगा
यह राहत सभी स्कूलों पर लागू नहीं होगी। जिन क्षेत्रों में बाढ़, जलभराव या रास्ते बंद होने जैसी कोई समस्या नहीं है, वहां स्कूलों में शिक्षक और कर्मचारी निर्धारित समय के अनुसार उपस्थित होंगे। यानी सामान्य परिस्थितियों में स्कूल की नियमित व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
जोखिम वाले स्कूलों की पहचान करेंगे संकुल प्राचार्य
शिक्षा विभाग ने सभी संकुल प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र में ऐसी स्कूलों की पहचान करें, जहां बारिश या जलभराव के कारण शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए पहुंचना जोखिम भरा हो सकता है। इन स्कूलों से संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति का अलग से सत्यापन किया जाएगा और संबंधित जानकारी कार्यालय को भेजी जाएगी।
शिक्षकों के लिए क्यों लिया गया फैसला?
मानसून के दौरान मध्यप्रदेश के कई ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं। कई जगह सड़कों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित होता है। ऐसी परिस्थितियों में सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने के लिए शिक्षकों को यात्रा करने से रोकना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही ऑनलाइन कक्षाओं के विकल्प से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से बचाने की कोशिश की जा रही है।