रायपुर में नाबालिग छात्रों के दोपहिया वाहन चलाने को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। 18 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों के बाइक या स्कूटर से स्कूल-कॉलेज पहुंचने पर रोक लगाने के लिए संस्थानों की जिम्मेदारी तय की जा रही है।RTO ने शहर के स्कूल-कॉलेज संचालकों और प्राचार्यों को पत्र जारी कर जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। संस्थानों से कहा गया है कि वे विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी स्पष्ट रूप से समझाएं कि नाबालिग बच्चों को दोपहिया वाहन चलाने के लिए न दिया जाए।
स्कूल स्तर पर ही बच्चों को समझाए जाएंगे यातायात नियम
प्रशासन का फोकस केवल कार्रवाई करने पर नहीं, बल्कि स्कूल सेफ्टी और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने पर भी है। स्कूल-कॉलेजों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यार्थियों को कम उम्र में बाइक या स्कूटर चलाने से होने वाले खतरों की जानकारी दें।इसके साथ ही बच्चों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करने और अभिभावकों से सहयोग लेने की बात कही गई है। उद्देश्य यह है कि बिना लाइसेंस नाबालिग छात्र वाहन लेकर सड़क पर न निकलें और दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।
पहले अभियान में 61 नाबालिग छात्र पकड़े गए थे
रायपुर यातायात पुलिस ने इससे पहले स्कूलों के आसपास विशेष जांच अभियान चलाया था। इस दौरान दोपहिया वाहन चलाते हुए 61 नाबालिग छात्रों को पकड़ा गया था।कार्रवाई के बाद इन छात्रों के अभिभावकों को यातायात मुख्यालय, कालीबाड़ी बुलाया गया और उनकी काउंसलिंग की गई। पुलिस ने उस समय स्पष्ट किया था कि कार्रवाई का उद्देश्य बच्चों को परेशान करना नहीं, बल्कि उन्हें सड़क हादसों से बचाना और सुरक्षित रखना है।काउंसलिंग के दौरान अभिभावकों को कम उम्र में वाहन चलाने से जुड़े जोखिम और सड़क दुर्घटनाओं के खतरे के बारे में भी जानकारी दी गई थी।
अभिभावकों पर भी हो सकती है कानूनी कार्रवाई
नाबालिग को दोपहिया वाहन चलाने की अनुमति देना अभिभावकों या वाहन मालिक के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। पुलिस ने अभिभावकों को मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के प्रावधानों की जानकारी दी है।नियमों के उल्लंघन पर 25 हजार रुपये तक के जुर्माने और 3 साल तक की सजा का प्रावधान बताया गया है। इसलिए प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को बाइक या स्कूटर चलाने की अनुमति न दें।
स्कूल जाने के लिए सुरक्षित परिवहन की सलाह
प्रशासन ने अभिभावकों से बच्चों को स्कूल-कॉलेज भेजने के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था अपनाने की अपील की है। इसके लिए स्कूल बस, सार्वजनिक परिवहन या परिवार के किसी वयस्क सदस्य के माध्यम से बच्चों को संस्थान तक पहुंचाने की सलाह दी गई है।वहीं, स्कूल-कॉलेज प्रबंधन को भी अपने स्तर पर निगरानी रखने और नाबालिग विद्यार्थियों के दोपहिया वाहनों से आने-जाने पर रोक लगाने के लिए जागरूकता बढ़ाने को कहा गया है।
प्रदेशभर में बढ़ सकता है जांच अभियान
रायपुर में पहले की कार्रवाई और अब RTO के निर्देशों के बाद आने वाले दिनों में नाबालिगों के दोपहिया वाहन चलाने के खिलाफ विशेष जांच अभियान का दायरा बढ़ाया जा सकता है।प्रशासन की कोशिश है कि स्कूल-कॉलेज स्तर पर ही बच्चों और अभिभावकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई कर सड़क हादसों को रोकने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाए।