रायपुर: विकास का अर्थ केवल नई सुविधाओं और अधोसंरचना का विस्तार नहीं है। विकास तब सार्थक होता है, जब महिला अपने भविष्य से जुड़े फैसले आत्मविश्वास के साथ ले सके, मां को बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण की चिंता में सहयोग मिले और हर बच्चे को शिक्षा, पोषण और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिले। ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी मानवीय सोच को जनभागीदारी के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाने का प्रयास है।
जनसेवा की भावना से आगे बढ़ रहा अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है। अभियान का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ उन परिवारों तक पहुंचाना है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
महिलाओं का आत्मविश्वास बनेगा समाज की ताकत
छत्तीसगढ़ की महिलाएं परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। अब वे अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रही हैं। महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने अनेक महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं और पारिवारिक खर्च से जुड़े फैसले लेने में सहारा दिया है।
आर्थिक सहायता से बढ़ रहे आत्मनिर्भरता के अवसर
महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग कई महिलाएं बचत के लिए कर रही हैं, जबकि कुछ महिलाएं इसे छोटे आजीविका प्रयासों का आधार बना रही हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाएं बचत, कौशल विकास और उद्यमिता से जुड़ रही हैं। प्रयास है कि महिलाओं को आर्थिक सहायता के साथ आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के अवसर भी मिलें।
आंगनवाड़ी से जुड़े परिवार और समुदाय
एक स्वस्थ और सक्षम समाज की नींव बचपन में पड़ती है। आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के साथ-साथ माताओं को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन केंद्रों की सफलता के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ परिवार और समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ इसी साझा दायित्व की भावना को मजबूत करता है।
25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक होगा ‘आंगन मिलन’
25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘आंगन मिलन’ परिवार और समुदाय की भागीदारी को और मजबूत करने का अवसर देगा। इस दौरान अभिभावक और समुदाय के लोग आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों से जुड़ सकेंगे। साथ ही बच्चों के भोजन, स्वच्छता और पोषण से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी।
बच्चों के पोषण पर होगा विशेष जोर
‘आंगन मिलन’ के दौरान परिवारों को बच्चों के खान-पान और स्वच्छता से जुड़ी जरूरी जानकारी देने पर जोर रहेगा। घर में बच्चों को क्या खिलाना चाहिए, भोजन में विविधता कैसे लाई जाए और स्वच्छता की अच्छी आदतें कैसे विकसित की जाएं, जैसे विषयों पर संवाद किया जाएगा। इससे बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर परिवारों की जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ का संदेश
पोषण केवल बच्चे को भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार, बच्चों की वृद्धि पर नजर और उनकी देखभाल में परिवार की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ का संदेश इसी सोच को हर परिवार तक पहुंचाने का प्रयास है।
सुरक्षित बचपन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी
हर बच्चे को भय, हिंसा और शोषण से मुक्त वातावरण मिलना जरूरी है। बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा और उपेक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए केवल कानून पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। परिवार, विद्यालय, पंचायत, आंगनवाड़ी और समुदाय को मिलकर बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहना होगा।
बच्चों की आवाज सुनना और समय पर मदद पहुंचाना जरूरी
बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उनकी बात सुनना और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता उपलब्ध कराना सुरक्षित बचपन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और सक्रिय भागीदारी से बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है।
सेवा का अर्थ जरूरतमंदों तक पहुंचना
‘सेवा संकल्प अभियान’ यह संदेश देता है कि सेवा का वास्तविक अर्थ लोगों तक पहुंचना और उनकी जरूरतों को समझना है। किसी मां को पोषण संबंधी सही जानकारी मिलना, किसी महिला को आजीविका का अवसर मिलना और किसी बच्चे को सुरक्षित वातावरण मिलना ही अभियान की सार्थक उपलब्धियां होंगी।
सहभागिता से मजबूत होगा विकसित छत्तीसगढ़ का आधार
‘आंगन मिलन’ से शुरू होने वाले संवाद और सहभागिता को लगातार बनाए रखने की जरूरत है। जब परिवार, समुदाय और शासन मिलकर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, तभी सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित, सुरक्षित बचपन के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की नींव और मजबूत होगी।