छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने नक्सलवाद पर चल रही कार्रवाई को लेकर कहा कि किसी भी समस्या का समाधान अगर संवाद और समझाइश से निकल सकता है, तो वह रास्ता सबसे बेहतर होता है, लेकिन जब बातचीत बेअसर हो जाए, तो सख्ती जरूरी हो जाती है।
पहले संवाद, लेकिन जरूरत पड़ने पर सख्ती भी जरूरी
उन्होंने इस संदर्भ में रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने भी रावण को पहले समझाया होगा, उसे शांति का संदेश भेजा होगा, लेकिन जब रावण नहीं माना, तो युद्ध हुआ।
ठीक उसी तरह सरकार भी पहले नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करती है, पुनर्वास की नीतियों के तहत काम करती है, लेकिन जब यह प्रयास असफल हो जाते हैं, तब कड़ी कार्रवाई जरूरी होती है।
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