नई दिल्ली/मुंबई: तीन साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार डिजिटल पर्दे पर रिलीज हुई अभिनेता दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) की बहुचर्चित फिल्म 'सतलुज' (Satluj) एक बार फिर भारी कानूनी और राजनीतिक विवादों में घिर गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) के कड़े रुख के बाद, रिलीज के महज दो दिन के भीतर ही इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) से हटा दिया गया है। फिल्म पर लगे इस प्रतिबंध के बाद अब सिख समुदाय और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है।
क्यों लगा फिल्म पर प्रतिबंध?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिल्म 'सतलुज' पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के उल्लंघन का आरोप लगा है।
सेंसर बोर्ड की अनुमति के बिना रिलीज: शिकायत है कि निर्माताओं ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से उचित थियेट्रिकल क्लीयरेंस (सिनेमाघरों में रिलीज का सर्टिफिकेट) मिलने से पहले ही इसे ओटीटी पर रिलीज कर दिया।
नाम बदलने का आरोप: मंत्रालय का कहना है कि फिल्म के पास सिनेमाघरों में रिलीज की तय प्रक्रिया पूरी नहीं थी, और निर्माताओं ने प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए फिल्म का नाम बदलकर इसे सीधे 'सतलुज' नाम से ओटीटी पर स्ट्रीम कर दिया।
उच्च स्तरीय समिति का गठन: इस पूरे विवाद की समीक्षा के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट आने तक फिल्म के प्रसारण पर रोक रहेगी।
दिलजीत के समर्थन में उतरी दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
फिल्म को बैन किए जाने और ZEE5 से हटाए जाने के बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है।
हरमीत सिंह कालका ने कहा: "यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है। फिल्म को प्रतिबंधित करना पंजाब के इतिहास के एक बेहद महत्वपूर्ण और काले अध्याय को जनता के सामने आने से रोकने की कोशिश है। यह जसवंत सिंह खालरा की सच्चाई को दबाने के अलावा और कुछ नहीं है।"
क्या है जसवंत सिंह खालरा की कहानी?
सिख कमेटी के अध्यक्ष ने फिल्म की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि जसवंत सिंह खालरा ने पंजाब के उस दौर की भयावह सच्चाई को दुनिया के सामने रखा था, जहां 25,000 शवों को 'लावारिस' बताकर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। खालरा ने उन अज्ञात शवों की पहचान कर मानवाधिकारों की रक्षा की थी। कालका ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक अध्याय को दर्शकों से छिपाना सरासर नाइंसाफी है। उन्होंने देश के सभी सिख संगठनों से अपील की है कि वे इस फिल्म और इसके पीछे की सच्चाई को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगे आएं।
फिलहाल, ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने दिलजीत दोसांझ और फिल्म के मेकर्स के प्रति अपना समर्थन बनाए रखा है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के अगले आदेश तक फिल्म को दोबारा स्ट्रीम नहीं किया जा सकता है।